श्रेष्ठ फोटो को मिलेगा 31 हजार रुपये का इनाम
आदिम जाति कल्याण विभाग के उपक्रम वन्या द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आदिवासी जीवन के झिलमिल रंगों पर केन्द्रित पंचम राष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिता 'प्रतिबिम्ब' आयोजित की जायेगी। प्रतियोगिता के लिये प्रविष्टियां 28 फरवरी 2010 तक आमंत्रित की गईं हैं।
इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के रूप में 31 हजार रुपये नगद एवं प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा तथा द्वितीय पुरस्कार के रूप में 21 हजार और तृतीय पुरस्कार के रूप में 11 हजार नगद एवं प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा। प्रतियोगिता की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
वन्या के प्रबंध संचालक श्रीराम तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि आदिवासियों के जीवन को रेखांकित करने वाली इस राष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिता में विविध जनजातीय जीवन, संस्कृति एवं परम्पराओं को प्रतिबिम्ब किया जाता है। इस विधा में पारंगत कोई भी फोटोग्राफर इस प्रतियोगिता में भाग ले सकता है और आदिवासी जीवन से सरोकार रखने वाले फोटो भेज सकता है। श्रेष्ठ फोटो का चयन निर्णायक मण्डल द्वारा किया जायेगा और उन्हें पुरस्कृत भी किया जायेगा।
श्री तिवारी ने बताया कि इसके अलावा चार श्रेष्ठ फोटो को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में ढाई-ढाई हजार रुपये एवं प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि वन्या की बाल पत्रिका समझ-झरोखा के बैनरतले यह फोटो प्रतियोगिता वर्ष 2005 से प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।
वन्या के प्रबंध संचालक श्रीराम तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि आदिवासियों के जीवन को रेखांकित करने वाली इस राष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिता में विविध जनजातीय जीवन, संस्कृति एवं परम्पराओं को प्रतिबिम्ब किया जाता है। इस विधा में पारंगत कोई भी फोटोग्राफर इस प्रतियोगिता में भाग ले सकता है और आदिवासी जीवन से सरोकार रखने वाले फोटो भेज सकता है। श्रेष्ठ फोटो का चयन निर्णायक मण्डल द्वारा किया जायेगा और उन्हें पुरस्कृत भी किया जायेगा।
श्री तिवारी ने बताया कि इसके अलावा चार श्रेष्ठ फोटो को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में ढाई-ढाई हजार रुपये एवं प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि वन्या की बाल पत्रिका समझ-झरोखा के बैनरतले यह फोटो प्रतियोगिता वर्ष 2005 से प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।
जिसका उद्देश्य आदिवासियों के जीवनवृत को चित्रों के माध्यम से समाज तक पहंचाना एवं कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। उन्होने बताया कि इस प्रतियोगिता में देश-विदेश के श्रेष्ठ छायाकार, आदिवासी लोककला, संस्कृति, जीवनशैली एवं उनके रहन-सहन को आधार बनाकर मनोहारी छायाचित्रों को अपने कैमरे की आंख से देखकर प्रतिबिम्बित करते है।
इस प्रतियोगिता के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को करीब से देखने का अवसर प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये कोई भी छायाकार अपनी प्रविष्टि 28 फरवरी 2010 तक वन्या, राजीव गांधी भवन 35, श्यामला हिल्स, भोपाल को भेज सकते है।
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