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Monday, December 21, 2009

जिला परिवहन प्राधिकार की स्थापना, चालक लायसेंस बोर्ड समाप्त होंग

प्रदेश की नई परिवहन नीति मंजूर (मंत्रि परिषद के निर्णय)
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मंत्रि परिषद की बैठक में प्रदेश की नई परिवहन नीति को अनुमोदित किया गया। नीति के अंतर्गत स्टेट ट्रांसपोर्ट आथरिटी तथा रीजनल ट्रांसपोर्ट आथरिटी की तर्ज पर जिले के भीतर रूट निर्धारित करने तथा परमिट देने के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला ट्रांसपोर्ट आथरिटी का गठन किया जायेगा।जिला परिवहन प्राधिकार बस परमिट के आवेदनपत्रों की समीक्षा करने के बाद स्थानीय जरूरतों को देखते हुए परमिट स्वीकृत करेगा। अंतर जिला एवं अंतर संभागीय मार्गों के लिये परमिट राज्य परिवहन प्राधिकार से ही जारी होंगे। राज्य परिवहन प्राधिकार तथा क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार द्वारा जारी किये जाने वाली व्यवस्था का पूरी तरह कम्प्यूटरीकरण किया जायेगा। 
यात्रियों की सुरक्षा तथा परिवहन की गुणवत्ता की दृष्टि से राज्य में चल रही यात्री बसों की आयु सीमा परमिट शर्तों में निर्धारित की जायेगी। अंतर्राज्यीय रूट के लिए यह आयु सीमा दस वर्ष, राज्य के भीतर रूट के लिए पन्द्रह वर्ष और ग्रामीण रूट के लिए बीस वर्ष होगी। बसों का किराया निर्धारण नियमित रूप से प्रतिवर्ष किया जायेगा। 
जिससे यात्रियों के हितों के संरक्षण के साथ-साथ बस परिवहन व्यवसायिक आधार पर संचालित हो सकेगी। विभिन्न रूटों पर संचालित होने वाले सार्वजनिक परिवहन साधनों का चिन्हाकंन किया जायेगा और लंबी दूरी के लिए बड़ी बसों को प्रोत्साहित किया जायेगा।
नई नीति में यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन साधनों को प्रोत्साहित किया जायेगा जिसमें सभी क्षेत्रों में विशेष रूप से बसों की व्यवस्था की जायेगी। मालवाहक परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण किया जायेगा। प्रदेश में राजमार्गों, जिला मार्गों तथा ग्रामीण मार्गों का निरन्तर विकास और निर्माण किया जायेगा जिससे सभी क्षेत्रों में आवागमन के साधन उपलब्ध हो सकें। सड़कों पर जानमाल की सुरक्षा बढ़ाने तथा दुर्घटनाएं कम करने के उपायों को उच्च प्राथमिकता दी जायेगी।
नई नीति के अंतर्गत प्रदेश के अंदर बसों के संचालन के लिए खुली परमिट व्यवस्था आवश्यक नियंत्रण के साथ जारी रहेगी। बस आपरेटरों के बीच स्वास्थ्य प्रतिस्पर्द्धा पैदा की जायेगी और निजी आपरेटरों द्वारा उपयोग किये जा रहे परिवहन साधनों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जायेगी। बस रूटों पर किसी व्यक्ति, संस्था अथवा कम्पनी का एकाधिकार न हो, इसके लिये किसी एक पार्टी अथवा उसके निकट संबंधियों को किसी एक रूट के पचास प्रतिशत से अधिक अनुज्ञापत्र सामान्यत: नहीं दिये जायेंगे। परमिट शर्तों का कड़ाई से पालन कराया जायेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन और आवागमन को अधिक सुलभ और आसन बनाने के लिए नीति में प्रावधान है कि जिला परिवहन प्राधिकार द्वारा यात्री बस यातायात की मांग एवं रूपरेखा का सर्वेक्षण कराया जायेगा जिससे दरों का युक्तियुक्तकरण हो सके और सम्पर्कहीन क्षेत्रों में यात्री बस सेवाएं प्रांरभ की जा सके। नीति के अंतर्गत बस स्टेंड व्यवस्था में सुधार किया जायेगा और वहां सभी मूलभूत रात्रि सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेगी। 
प्रमुख एवं अतंर्राज्यीय बस स्टेंड के उन्नयन और आधुनिकीकरण का कार्य जन-निजी भागीदारी से कराया जायेगा। प्रदेश में परिवहन आधारभूत सुविधा विकास के लिए उचित इकाई का गठन किया जायेगा।
इसके अलावा सड़क परिवहन निगम को पूरी तरह समाप्त करने का भी नीति में प्रावधान है। सभी संबंधितों के हितों को ध्यान में रखते हुए निगमों के शेष कर्मचारियों की सेवाएं विधिवत समाप्त करने की कार्रवाई की जायेगी। निगम के अंतर्राज्यीय बस रूटों के समापन के पूर्व उचित वैकल्पिक व्यवस्था की जायेगी। शासन द्वारा निगम की भूतपूर्व परिसम्पत्तियों का यथाशीघ्र निर्वातन किया जायेगा।
माल परिवहन के संबंध में नीति में प्रावधान है कि अंतर्राज्यीय माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिये नेशनल परमिट व्यवस्था को सुदृढ़ किया जायेगा। प्रदेश के अंदर मालयानों की विशेषता परिवहन तथा पुलिस विभागों द्वारा अनावश्यक चैंकिंग नहीं की जायेगी और उन्हें बिना वजह रोका नहीं जायेगा। सीमावर्ती चौकियों में चैंकिंग व्यवस्थित और कम्प्यूटरीकृत होगी। सीमा जांच चौकियों पर एकीकृत एवं इलेक्ट्रानिक जांच चौकियों का निर्माण किया जायेगा।
शहरी क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था सुधार के लिए बड़े शहरों में बस रेपिड ट्रांजिस्ट सिस्टम यथा संभव लागू किया जायेगा। महानगरों में प्रदूषण कम करने के लिए सीएनजी एवं आटो एलपीजी आधारित परिवहन व्यवस्था को निर्धारित किया जायेगा। नीति में सड़क दुर्घटनाएं कम करने के उपाय भी किये गये। 
चालक लायसेंस देने की व्यवस्था कड़ी की जायेगी और लायसेंस बोर्ड समाप्त किया जायेगा। साथ ही वाहनों के फिटनेस चैंकिंग व्यवस्था का और भी प्रभावी बनाया जायेगा। राज मार्गों पर ट्रामा सेंटर स्थापित किये जायेंगे। 
दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को ट्रामा सेंटर में पहुंचाने के लिये एम्बुलेंस नेटवर्क 108 से समन्वय कर सेवाएं उपलब्ध कराई जायेगी। नीति में परिवहन अधोसंरचना के विकास, राजस्व संग्रहण एवं कर प्रणाली को मजबूत बनाने, आधुनिकी तकनीकी का समावेश करने तथा वैकल्पिक आवागमन साधन उपलब्ध कराने के भी प्रावधान किये गये हैं।

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