राज्य विधान सभा में इस आशय का संशोधन विधेयक पारित
प्रदेश में अब बिना परमिट के चलने वाले वाहन मालिकों को दुगनी राशि दंड के रूप में भरनी होगी। शुक्रवार को राज्य विधान सभा में इस आशय का संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया है।
विधेयक के संबंध में जानकारी देते हुये परिवहन एवं जेल मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि बिना परमिट वाले वाहनों के अलावा अब उन वाहनों के मालिकों से भी दण्ड की दुगनी राशि कर के रूप में वसूल की जायेगी, जो राज्य के परिवहन प्राधिकारों द्वारा जारी परमिट की शर्तों का उल्लंघन करते पाये जायेंगे।
श्री देवड़ा ने बताया कि 20 नवंबर को विधान सभा में पारित संशोधन विधेयक लाने के पीछे शासन की यह मंशा है कि अब तक प्रदेश में बिना परमिट के वाहन चलाने का दु:साहस करने वालों को अधिक आर्थिक क्षति वहन करना पड़े। साथ ही इस संशोधित विधेयक से उन लोगों पर भी अंकुश लगेगा, जो वाहन चालन का परमिट तो रखते हैं किन्तु परमिट में उल्लेखित शर्तों का उल्लंघन करते हैं।
श्री देवड़ा ने बताया कि 20 नवंबर को विधान सभा में पारित संशोधन विधेयक लाने के पीछे शासन की यह मंशा है कि अब तक प्रदेश में बिना परमिट के वाहन चलाने का दु:साहस करने वालों को अधिक आर्थिक क्षति वहन करना पड़े। साथ ही इस संशोधित विधेयक से उन लोगों पर भी अंकुश लगेगा, जो वाहन चालन का परमिट तो रखते हैं किन्तु परमिट में उल्लेखित शर्तों का उल्लंघन करते हैं।
परमिट में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों को भी मध्यप्रदेश या अन्य राज्यों के परिवहन प्राधिकारों द्वारा जारी परमिटों की शर्तों का उल्लंघन करते पाये जाने पर निर्धारित राशि का दुगना दण्ड के रूप में चुकाना होगा।
परिवहन मंत्री ने बताया कि 5 अक्टूबर 09 को एक अध्यादेश जारी कर मोटर यान कराधान अधिनियम 1991 की धारा 13 में संशोधन कर प्रदेश में दण्ड स्वरूप कर में दोगुनी राशि वसूलने की यह व्यवस्था लागू की गई है। श्री देवड़ा ने बताया कि पूर्व में दण्ड की राशि इतनी कम थी कि बिना परमिट अथवा परमिट में उल्लेखित शर्तों का उल्लंघन करने वाले मोटर मालिकों को लगता था कि दण्ड का कोई भय ही नहीं था।
परिवहन मंत्री ने बताया कि 5 अक्टूबर 09 को एक अध्यादेश जारी कर मोटर यान कराधान अधिनियम 1991 की धारा 13 में संशोधन कर प्रदेश में दण्ड स्वरूप कर में दोगुनी राशि वसूलने की यह व्यवस्था लागू की गई है। श्री देवड़ा ने बताया कि पूर्व में दण्ड की राशि इतनी कम थी कि बिना परमिट अथवा परमिट में उल्लेखित शर्तों का उल्लंघन करने वाले मोटर मालिकों को लगता था कि दण्ड का कोई भय ही नहीं था।
दण्ड की राशि कम होने पर वे आसानी से उसका भुगतान कर अवैध तरीके से वाहन चालन करते थे। संशोधन विधेयक से जहाँ इस तरह की मानसिकता को हताश किया जा सकेगा वहीं शासन के राजस्व में भी वृद्धि हो सकेगी। मंत्री ने बताया कि पूर्व में कम से कम दो हजार व अधिक से अधिक पाँच हजार रूपये का दंड होता था तथा दूसरी बार कम से कम पाँच हजार रूपये व अधिक से अधिक 10 हजार रूपये या एक वर्ष कारावास या दोनों का प्रावधान था।
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