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Sunday, November 22, 2009

अधिकारी मीडिया ट्रायल से बचें – न्यायमूर्ति श्री के.के. वर्मा

 मीडिया का हस्तक्षेप बढ़ा 
अभियोजन एवं अनुसंधान अधिकारी को मीडिया ट्रायल से यथासंभव बचना चाहिये, ताकि प्रकरण की वास्तविकता और अनुसंधान कार्य प्रभावित ना होने पायें। यह विचार न्यायमूर्ति श्री के.के. वर्मा ने आज यहाँ आर.सी.व्ही.पी. प्रशासन अकादमी में अभियोजन अधिकारियों के प्रशिक्षण समापन सत्र को संबोधित करते हुये व्यक्त किये।
न्यायमूर्ति श्री वर्मा ने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में किसी भी घटनाक्रम को लेकर तथा हाईप्रोफाईल मामलों में न्यायालय में हुये गवाहों के कथनों में तथा अद्यतन स्थिति के संबंध में चर्चा करता है। मीडिया की इन तीव्र गतिविधियों से कुछ हद तक आपराधिक न्याय प्रणाली प्रभावित होने लगीं हैं।
घटना घटित होने अथवा घटना के बाद एफ.आई.आर दर्ज न होने आदि के संबंध में भी मीडिया का हस्तक्षेप बढ़ गया है। इससे आम जनता का मनोभाव आकर्षित होना स्वाभाविक है। घटना की वास्तविकता चाहे सही रूप में हो या घटना के बारे में वह लोगों के विचार हों, यद्यपि लोगों के विचारों का कोई वैधानिक सात्विक मूल्य नहीं होता है।
इसलिये अनुसंधान अधिकारी को मीडिया ट्रायल से अपने आपको परे रखना चाहिये, ताकि किसी भी प्रकार से अनुसंधान प्रभावित न हो और वास्तविक तथ्य तथा साक्ष्य रिकार्ड पर आयें। उन्होंने कहा कि कई बार न्यायालय की कार्यवाही के संबंध में भी अभियोजक से प्रश्न-उत्तर किये जाते हैं, अभियोजक को उत्तर देते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि उनके द्वारा व्यक्त विचार से किसी भी तरह प्रकरण की वास्तविकता प्रभावित ना हो।
संचालक लोक अभियोजना श्री नवल किशोर गर्ग ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों के उज्जवल भविष्य की शुभकामनायें दी। इस अवसर पर प्रशिक्षण संचालक डॉ. नजमी, संयुक्त संचालक श्री मानसिंह अचाले, उप संचालक श्री सतीश दिनकर, प्रशिक्षु अभियोजन अधिकारी आदि उपस्थित थे।

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