एसडीएम और कॉलोनाइज़र घेरे में, बनाई थी अवैध कॉलोनी
लोकायुक्त पुलिस ने सिवनी जिले में एक ज़मीन घोटाले की शिकायत के चलते तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और कॉलोनाइज़र के खिलाफ मामला पंजीबद्ध कर जाँच शुरू कर दी है। इस सिलसिले में सिवनी जिले के बावरिया ग्राम में सांठगांठ के जरिए अवैध कॉलोनी विकसित की गई थी। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।
लोकायुक्त पुलिस ने बाकायदा शिकायत की तस्दीक की और फिर मामला पंजीबद्ध कर जाँच शुरू की। इस मामले में पहली ही नज़र में पता चला कि तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी आर.आर. मरावी ने कॉलोनाइज़र और बिल्डर मनोज पाराशर तथा उसके पिता रामकिशन पाराशर के साथ सांठगांठ कर अवैध कालोनी के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया था।अनुविभागीय अधिकारी के पास इस सिलसिले में उक्त बिल्डर ने कॉलोनी निर्माण की अनुमति का जो आवेदन दिया था उसमें निर्धारित अर्हताएं और विकास राशि जमा करने का उल्लेख नहीं था। जब अनुविभागीय अधिकारी ने इस मामले को अनापत्ति पत्र के लिए नगर पालिका परिषद को भेजा तो उसने उपरोक्त खामियों के तथ्य से अनुविभागीय अधिकारी को अवगत कराया।
नगर पालिका परिषद ने अनापत्ति पत्र जारी नहीं किया और कई बार अनुविभागीय अधिकारी को वस्तुस्थिति से अवगत कराया तथा बिल्डर का लायसेंस खारिज करने को कहा। लेकिन सांठगांठ के चलते इस अफसर ने इन सूचनाओं की अनदेखी कर बिल्डर के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। अलबत्ता उन्होंने बिल्डर को अवैध कॉलोनी निर्माण का पर्याप्त समय दिया।
नगर पालिका परिषद ने अनापत्ति पत्र जारी नहीं किया और कई बार अनुविभागीय अधिकारी को वस्तुस्थिति से अवगत कराया तथा बिल्डर का लायसेंस खारिज करने को कहा। लेकिन सांठगांठ के चलते इस अफसर ने इन सूचनाओं की अनदेखी कर बिल्डर के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। अलबत्ता उन्होंने बिल्डर को अवैध कॉलोनी निर्माण का पर्याप्त समय दिया।
इसके चलते सरकार को विकास शुल्क, बाहरी विकास शुल्क और बाहरी विकास राशि के रूप में राजस्व की हानि पहुंचाई गई। दूसरी ओर कॉलोनाइज़र, बिल्डर ने करोड़ों रुए की ज़मीन बेचकर अवैध लाभ कमाया। जबलपुर संभाग की विशेष लोकायुक्त स्थापना ने उपरोक्त तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण और भारतीय दंड विधान की धाराओं में मामला पंजीबद्ध कर जाँच तेज कर दी है।
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