संस्कृति मंत्री की अध्यक्षता में नवगठित संस्कृति परिषद की पहली बैठक सम्पन्न
संस्कृति, जनसंपर्क, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा की अध्यक्षता में आज यहां मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में निर्देश दिये गये कि संस्कृति विभाग द्वारा जिन संस्थाओं को अनुदान दिया जाता है उनके काम-काज की जांच कराई जाये।
एक अभियान के तहत यह कार्य करने के लिये एक समिति गठित करने के भी निर्देश दिये गये। लगभग 200 संस्थाओं को विभाग द्वारा वर्ष में अनुदान दिये जाते हैं।
नवगठित संस्कृति परिषद की यह पहली बैठक थी। बैठक में परिषद के सदस्य, सांसद श्री अनिल दवे सहित अन्य शासकीय एवं अशासकीय सदस्य उपस्थित थे। बैठक में शंकराचार्य पीठ ओंकारेश्वर और परशुराम पीठ जानापाव में स्थापित करने की भी अनुशंसा की गई। धार स्थित फड़के संग्रहालय को व्यवस्थित करने के निर्देश भी दिये गये। बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य की संस्कृति नीति अगले तीन माह में तैयार हो जायेगी।
संस्कृति मंत्री ने समय-सीमा के भीतर इस कार्य को पूरा करने के निर्देश दिये। भोपाल में स्थापित कथक केन्द्र को नृत्य केन्द्र के रूप में संचालित करने तथा यहां ओड़िसी और भरतनाट्यम की शिक्षा देने की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिये गये।
संस्कृति विभाग और उसके अंतर्गत गठित अकादमियों के वर्ष 2010-11 में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का निर्धारण करने के लिये एक समिति गठित करने के भी निर्देश दिये गये। यह समिति यह भी सुझाव देगी कि वर्तमान में संचालित किन-किन कार्यक्रमों को बंद किया जा सकता है। संस्कृति विभाग के अंतर्गत अकादमियों द्वारा प्रकाशित की जा रही पत्रिकाओं की भी समीक्षा कर आवश्यकतानुसार समेकित प्रकाशन करने के लिये सुझाव देने के संबंध में भी एक समिति गठित करने के निर्देश दिये गये।
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सांची में बौद्ध संस्कृति और साहित्य का एक प्रमुख केन्द्र स्थापित करने के बारे में भी योजना बनाने का सुझाव दिया गया। प्रदेश के कलाकारों और साहित्यकारों एवं कलासाधकों की डायरेक्ट्री एक माह में तैयार करने की समय-सीमा तय की गई।
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सांची में बौद्ध संस्कृति और साहित्य का एक प्रमुख केन्द्र स्थापित करने के बारे में भी योजना बनाने का सुझाव दिया गया। प्रदेश के कलाकारों और साहित्यकारों एवं कलासाधकों की डायरेक्ट्री एक माह में तैयार करने की समय-सीमा तय की गई।
प्रतिभावान कलाकारों की खोज के लिये प्रतिभा खोज परीक्षा एवं पुरस्कार योजना तथा स्कूल शिक्षा विभाग एवं उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से संस्कृति ज्ञान परीक्षा एवं पुरस्कार योजना तैयार करने के निर्देश दिये गये। संस्कृति मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि परिषद के विषय-विशेषज्ञ सदस्यों के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रदेश की संस्कृति के विस्तार के लिये पहल की जायेगी।
सांसद श्री अनिल दवे ने विभाग और अकादमियों के कार्यक्रमों एवं कार्यों की स्पष्ट परिधि निर्धारित करने के साथ ही वित्तीय अनुशासन एवं कार्यों के सोशल आडिट का सुझाव दिया। उन्होंने विभाग के कार्यक्रमों में जन-भागीदारी बढ़ाने के साथ ही प्रदेश के विभिन्न अंचलों की कला, साहित्य एवं संस्कृति के पोषण की आवश्यकता बताई। सामान्य सभा के सदस्यों ने संस्कृति के कार्यक्रमों के संबंध में सुझाव दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव संस्कृति श्रीमती आभा अस्थाना और संस्कृति संचालक भी उपस्थित थे।
सांसद श्री अनिल दवे ने विभाग और अकादमियों के कार्यक्रमों एवं कार्यों की स्पष्ट परिधि निर्धारित करने के साथ ही वित्तीय अनुशासन एवं कार्यों के सोशल आडिट का सुझाव दिया। उन्होंने विभाग के कार्यक्रमों में जन-भागीदारी बढ़ाने के साथ ही प्रदेश के विभिन्न अंचलों की कला, साहित्य एवं संस्कृति के पोषण की आवश्यकता बताई। सामान्य सभा के सदस्यों ने संस्कृति के कार्यक्रमों के संबंध में सुझाव दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव संस्कृति श्रीमती आभा अस्थाना और संस्कृति संचालक भी उपस्थित थे।
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