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Saturday, November 21, 2009

आदिवासी संस्कृति को मुख्य धारा से जोड़ा जाना एक बड़ी चुनौती

"जनजातीय क्षेत्रों में संचार माध्यमों का प्रभाव" विषय पर व्याख्यान
दूरदर्शन की महानिदेशक श्रीमती अरूणा शर्मा ने कहा है कि संचार माध्यमों के समक्ष यह चुनौती है कि जनजाति क्षेत्रों में उनकी प्राचीन संस्कृति को बचाते हुये इन वर्ग के लोगों को विकास की मुख्य धारा से जोड़े। इस कार्य को संचार के विभिन्न माध्यम बेहतर तरीके से कर सकते है।
श्रीमती शर्मा आज भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था मध्यप्रदेश (टी.आर.आई.) द्वारा आयोजित 'जनजातीय क्षेत्रों में संचार माध्यमों का प्रभाव' विषय पर अपना व्याख्यान दे रही थी। इस मौके पर संस्था की संचालक श्रीमती आई.एम. चहल भी मौजूद थी।
महानिदेशक श्रीमती अरूणा शर्मा ने कहा कि आदिवासी वर्ग की यह विशेषता रही है कि वह अपनी जरूरत के मुताबिक ही प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करती है। यह वर्ग अनावश्यक संग्रह की प्रवृत्ति की आदत से बचे रहते हैं, लेकिन वन क्षेत्रों में नये-नये कानूनों ने इनके समक्ष अस्तिव का खतरा खड़ा कर दिया है। 
आज जरूरत इस बात है कि इन कानूनों की सही जानकारी इन्हें दी जाये। इस कार्य में कलापथक दल के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक मीडिया की भूमिका प्रभावी है। दूरदर्शन महानिदेशक श्रीमती शर्मा ने कहा कि हिन्दुस्तान में आदिवासी संस्कृति 4 हजार वर्ष से भी अधिक पुरानी है और काफी समृद्ध है। कला, साहित्य एवं स्वास्थ्य ऐसे क्षेत्र है जहाँ इनकी गौरवशाली विरासत का दस्तावेजीकरण (डाक्यूमेंटशन) किये जाने की जरूरत है। 
आयुष के क्षेत्र में वनवासियों के पास दुर्लभ वन औषधि है अचूक नुस्खे है जिन पर रिसर्च की और आवश्यकता है। श्रीमती शर्मा ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में उत्पन्न हो रही समस्याओं का निराकरण उनकी भाषा और उनकी संस्कृति को अपनाकर बेहतर तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने कलापथक दल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बताया कि दूरदर्शन डी.डी. इण्डिया जिसकी पहुँच 146 देशों में है उस पर शीघ्र ही एक अभिनव कार्यक्रम 'वायस आफ इण्डिया' की शुरूआत की जा रही है। इस कार्यक्रम के जरिये विभिन्न विषयों पर भारत के मत को प्रस्तुत किया जायेगा।
संस्था की संचालक श्रीमती आई.एम. चहल ने बताया कि मध्यप्रदेश का आदिवासी अनुसंधान संस्था देश के अन्य राज्यों के संस्थानों के लिये नोडल ऐजेन्सी की तरह कार्य कर रहा है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में विकास के लिये किये जा रहे कार्यों में दूरदर्शन की भूमिका को अद्वितीय बताया। 
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार श्री मदनमोहन जोशी ने आदिवासी क्षेत्रों में उनकी संस्कृति को अपनाकर किये गये रचनात्मक कार्यों के अनेक उदाहरण पेश किये। उन्होंने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में बड़ी से बड़ी समस्याओं का हल उनकी भाषा एवं संस्कृति को अपनाकर बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन अनुसंधान अधिकारी श्री लक्ष्मीनारायण पयोधि ने किया।

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