दो दिवसीय जैत यात्रा
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कल रविवार और आज सोमवार का पूरा दिन अपने गृह ग्राम जैत में बिताया। वे अपनी पत्नी श्रीमती साधना सिंह, पुत्र कुणाल और कार्तिकेय के साथ जैत पहुंचे। उन्होंने यहां आज भाई दूज पर सपरिवार कुलदेवता की पूजा अर्चना की और ग्रामीणों से मिलकर उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दी। उन्होंने ग्रामीणों से जन समस्याओं के आवेदन भी प्राप्त किए। बिना किसी लावलश्कर के अपनी निजी यात्रा पर जैत पहुंचे मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जनता से मिले बगैर मुझे चैन कहां। उन्होंने जैत में ही रात्रि विश्राम किया।बचपन में बिताए दिनों का स्मरण
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रविवार को ग्राम जैत पहुंचकर सपरिवार कुल देवता की पूजा अर्चना की। वे सपरिवार अपने खेत पर गए जहां उन्होंने बचपन में बिताए दिनों को याद किया। उन्होंने खेत में लगी धान की फसल को देखा।
मुख्यमंत्री ने जैत में ठेकेदार की उस टपरिया को भी देखा जहां वे बचपन में धमा-चौकड़ी मचाया करते थे। बटाईदार श्री कंछेदी लाल केवट के साथ मुख्यमंत्री ने करीब एक घन्टे का समय बिताया और बचपन में बीते पलों को याद किया। उन्होंने श्री कंछेदी लाल की मां श्रीमती मीराबाई केवट से मिलकर उनकी कुशलक्षेम पूछी।
आनंद की अनुभूति
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा तट पर पक्षियों के कलरव के बीच शान्त वातावरण में कुछ समय बिताया। उन्होंने शांत भाव से काफी देर तक प्रकृति के इस अनूठे सौन्दर्य को निहारते हुए कहा कि प्रकृति के अनोखे सौन्दर्य और मां नर्मदा के सानिघ्य से मुझे सुखद आनंद की अनुभूति होती है। मुख्यमंत्री ने यहां से लौटकर ग्रामीणों से उनकी कुशलक्षेम पूछी। वे स्व. श्रीमती सुन्दर देवी चौहान की स्मृति में निर्मित मंदिर में चल रही संध्या आरती में शामिल हुए।
आज सुबह की शुरूआत मुख्यमंत्री ने सपरिवार नर्मदा की पूजा अर्चना कर की। नर्मदा तट पर उन्होंने ग्रामीणों के साथ अपना फोटो भी खिचवाया।
जनता के दु:ख दर्द जाने
मुख्यमंत्री के जैत में निवास पर उनसे मिलने पहुंचे ग्रामीणों से उन्होंने आत्मीयता से भेंट की और उनकी समस्याओं पर चर्चा की। ग्रामीणों द्वारा अपनी विभिन्न समस्याओं के आवेदन पत्र सौंपे जाने पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जन कल्याण मेरा लक्ष्य है।
उन्होंने प्राप्त आवेदनों को मौके पर मौजूद अधिकारियों को सौंपते हुए सभी का निराकरण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सरदार नगर निवासी यादराम आत्मज जीवनलाल के पुत्र के पैर के ऑपरेशन के लिए दस हजार रूपये की आर्थिक सहायता मंजूर की।
उन्होंने कैंसर पीड़ित महिला श्रीमती गनेशी बाई पत्नी श्री छोटेलाल कहार को बेहतर उपचार के लिए तत्काल भोपाल भेजने के निर्देश दिए। इसी तरह उन्होंने श्रीमती कमलाबाई के भी समुचित उपचार के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की बागडोर संभाले एक लम्बा अर्सा गुजर जाने के बाद यह पहला मौका था जब मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दो दिन अपने गृह ग्राम जैत में अपनों के बीच बिताए।
अतीत का दोहराव
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अठारह और उन्नीस अक्टूबर को अलग मायने दिए। इन दो दिनों को इसलिए भी याद किया जायगा जब वे मुख्यमंत्री बनने के बाद लगातार दो दिन अपने गांव जैत में रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन पलों को जी भर जिया जो अतीत बन चुके थे।
गांव की गलियां हों, खेत की मेड़ हो या पुण्य सलिला नर्मदा का पावन तट। श्री चौहान सभी दूर बड़े सहज और सरल अंदाज में गए। अपनों से मिले और अपने अतीत को याद किया। वे अपने खेत पर पहुंचे। धान और तुअर के पौधों को अपनत्व भाव से छुआ और दुलारा। यह मिलन अपने आप में अनोखा था।
जो कदम कभी जैत की धूल भरी गलियों में विचरते थे, आज उन कदमों की आहट विकास का पर्याय मानी जाती है। कहने का तात्पर्य यह कि वे जहां भी जाते हैं वहां क्षेत्र के विकास को लेकर विचार जरूर करते हैं।
0 comments:
Post a Comment