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Friday, October 30, 2009

प्रदेश में संस्कृत को गांव-गांव घर-घर पहुँचायें

उज्जैन में 'कृष्णायन' संग्रहालय स्थापित किया जायेगा
Ujjain:Thursday, October 29, 2009:Updated 20:46IST मध्य प्रदेश में संस्कृत भाषा एवं साहित्य को गांव-गांव, घर-घर तक पहुँचायें। अखिल भारतीय कालिदास समारोह में अधिक से अधिक लोग सम्मिलित हों तथा समारोह में आने वाले मूर्धन्य कलाकारों, साहित्यकारों की कला/साहित्य का पूरा-पूरा आनन्द लें।
बुद्धिजीवी, जनप्रतिनिधि, मीडिया सभी मिलकर इस आयोजन को सफल बनायें। संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकान्त शर्मा ने यह विचार आज देव प्रबोधिनी एकादशी को अखिल भारतीय कालिदास समारोह के शुभारम्भ पर अपने संबोधन में व्यक्त किये।
संस्कृति मंत्री श्री शर्मा ने बताया कि कालिदास संस्कृत अकादमी द्वारा अब पूरे मध्य प्रदेश में संस्कृत साहित्य एवं भाषा पर आधारित विभिन्न गतिविधियों का सतत् रूप से आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन में ही शिक्षा ग्रहण की थी, अत: शासन ने निर्णय लिया है कि उज्जैन में उन पर आधारित 'कृष्णायन' नाम से एक संग्रहालय स्थापित किया जाये।
इस सम्बन्ध में जिला प्रशासन को भूमि उपलब्ध कराने तथा पुरातत्व विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में महाराजा विक्रमादित्य के नाम पर शोधपीठ का प्रारम्भ किया जा चुका है। कालिदास अकादमी परिसर में बनाये गये नवीन संकुल का लोकार्पण आगामी 4 नवम्बर को प्रस्तावित है तथा इसका नाम पं. सूर्यनारायण व्यास संकुल ही होगा।
कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व सांसद डॉ.सत्यनारायण जटिया ने कहा कि महाकवि कालिदास विश्वकवि थे। उनकी रचनाएं शाश्वत हैं।
कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति डॉ.राधावल्लभ त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय साहित्य एवं रंगमंच के विकास में कालिदास समारोह का विशिष्ट योगदान रहा है। कालिदास समारोह महाकवि कालिदास का वास्तविक अभिनन्दन, श्रद्धांजलि है तथा एक विलक्षण आयोजन है। कालिदास समारोह की पूरे विश्व में पहचान है। उन्होंने कहा कि कालिदास समग्रता के कवि हैं। कालिदास के माध्यम से भारत ने अपनी भारतीयता को पहचाना है। उनका साहित्य कालजयी है।
स्वागत भाषण में विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति श्री शिवपालसिंह अहलावत ने कहा कि संस्कृत हमें सुसंस्कृत करती है तथा सुसंस्कृत व्यक्ति कर्मठ होता है। उन्होंने संस्कृत को विश्व भाषा बनाये जाने पर बल दिया। उन्होंने उज्जैन का महत्व बताते हुए कहा कि यहीं शून्य का आविष्कार हुआ था।
मानवता के इतिहास में महाकवि कालिदास जैसा कलम का धनी दूसरा नहीं हुआ। प्रास्ताविक वक्तव्य में कालिदास अकादमी के निदेशक प्रो.मिथिलाप्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि गत एक वर्ष में पूरे मध्य प्रदेश में संस्कृत साहित्य पर आधारित 65 कार्यक्रम सम्पन्न हुए हैं।
कार्यक्रम में प्रकाशित शोध-पत्रों 'विक्रम शोध पत्रिका' तथा कालिदास शोध-पत्रिका 'वृत्तान्त' का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। पूर्व कुलपति डॉ.रामराजेश मिश्र ने विश्वकोष 'भारतायन' अतिथियों को समर्पित किया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में शासकीय उत्कृष्ट कन्या महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा नान्दी पाठ एवं कवि कुलगुरू कालिदास का कीर्तिगान प्रस्तुत किया गया। अतिथियों द्वारा कवि कुलगुरू कालिदास एवं पं.सूर्यनारायण व्यास के चित्रों पर माल्यार्पण किया तथा दीप-दीपन किया गया।
चित्रकला एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी का उद्घाटन
संस्कृति मंत्री श्री शर्मा ने कालिदास अकादमी परिसर में आयोजित राष्ट्रीय चित्रकला एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी का दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ किया। शुभारम्भ के पश्चात् मंत्री श्री शर्मा ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित किये गये चित्र एवं मूर्तिकला की कृतियों का अवलोकन किया।
श्री शर्मा ने कलाकारों की कला की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस चित्रकला एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी में न केवल मध्य प्रदेश बल्कि अन्य प्रदेशों के कलाकारों ने अपनी कृतियों का प्रदर्शन किया है। मूर्ति कला एवं चित्रकला प्रदर्शनी आम जन के लिये समारोह के अवसर पर नि:शुल्क खुली रहेगी।

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