मुख्य सचिव द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा
मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य ने प्रदेश में बच्चों के कुपोषण की समस्या के निदान के लिए जिला स्तरीय योजनाऐं बनाए जाने के निर्देश दिये हैं। मुख्य सचिव ने कहा है कि इस उद्देश्य से जिला कलेक्टरों को यह जिम्मेदारी सौंपी जावे कि वे इस समस्या के निवारण के लिए स्थानीय संसाधनों का उपयोग करे और स्थानीय स्तर पर ही इस दिशा में प्रभावी प्रयास करें।
मुख्य सचिव आज मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न गतिविधियों और योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने लाडली लक्ष्मी योजना की हितग्राही बालिकाओं को प्रदाय किये जाने वाले राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (एनएससी) के सुरक्षित रखरखाव के लिये केन्द्रीयकृत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।मुख्य सचिव ने लाडली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत लाभान्वित बालिकाओं की शिक्षा तथा उनको दिये जाने वाले हितलाभ के कार्यों में स्वयंसेवी संस्थाओं को भागीदारी देने और महिला वित्त एवं आर्थिक विकास निगम को इस योजना के क्रियान्वयन में जोड़े जाने के बारे में भी सुझाव दिये। उन्होंने कहा कि लाडली लक्ष्मी योजना के क्रियान्वयन के संबंध में प्रस्तावित कानून में इस उद्देश्य से जरूरी प्रावधान किये जायें।
इससे पहले प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक न्याय श्रीमती लवलीन कक्कड़ ने विभिन्न विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने एकीकृत बाल विकास योजना, पूरक पोषण आहार कार्यक्रम, लाडली लक्ष्मी योजना और घरेलू हिंसा से संरक्षण के संबंध में शुरू की गई उषा किरण योजना की उपलब्धियों के साथ ही बजट प्रावधान और अब तक व्यय राशि का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
इससे पहले प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक न्याय श्रीमती लवलीन कक्कड़ ने विभिन्न विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने एकीकृत बाल विकास योजना, पूरक पोषण आहार कार्यक्रम, लाडली लक्ष्मी योजना और घरेलू हिंसा से संरक्षण के संबंध में शुरू की गई उषा किरण योजना की उपलब्धियों के साथ ही बजट प्रावधान और अब तक व्यय राशि का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
श्रीमती कक्कड़ ने समेकित बाल विकास सेवा के माध्यम से संचालित प्रदाय सेवा केन्द्रों के कार्यों से अवगत कराया। इन केन्द्रों के जरिये पूरक पोषण आहार, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, संदर्भ सेवाओं, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा तथा स्कूल पूर्व अनौपचारिक शिक्षा की व्यवस्थाओं से अवगत कराया। प्रमुख सचिव श्रीमती कक्कड़ ने सरकार तथा समाज की भागीदारी से प्रारंभ केन्द्रीय प्रत्यायोजित योजना “समेकित बाल संरक्षण योजना’’ के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत बाल अधिकारों के संरक्षण के लिये राज्य स्तरीय आयोग का गठन किया जा चुका है। इसके साथ ही शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं की भागीदारी से राज्य एवं जिला स्तरीय बाल संरक्षण समितियों के गठन की कार्रवाई भी शीघ्र आरंभ की जा रही है। इस अनूठी योजना से कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे बच्चों के लिये एक सशक्त संरक्षणात्मक परिवेश का निर्माण कर ऐसे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की जा सकेगी।
मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक में राज्य में कुपोषाण कम करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा उठाए गये कदमों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने सुझाव दिया कि पोषण आहार के रूप में “फलों क वितरण’’ भी किया जाना चाहिये। इस दौरान उप सचिव महिला एवं बाल विकास श्रीमती कामिनी चौहान “रतन’’, प्रबंध संचालक एम.पी. एग्रो इंडस्ट्रीज श्री व्ही.एस. निरंजन, प्रबंध संचालक महिला वित्त एवं आर्थिक विकास निगम श्रीमती सुधा चौधरी तथा परियोजना संचालक आईसीडीएस श्री ज्ञानेश्वर पाटिल सहित विभागीय अधिकारीगण बैठक में मौजूद थे।
मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक में राज्य में कुपोषाण कम करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा उठाए गये कदमों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने सुझाव दिया कि पोषण आहार के रूप में “फलों क वितरण’’ भी किया जाना चाहिये। इस दौरान उप सचिव महिला एवं बाल विकास श्रीमती कामिनी चौहान “रतन’’, प्रबंध संचालक एम.पी. एग्रो इंडस्ट्रीज श्री व्ही.एस. निरंजन, प्रबंध संचालक महिला वित्त एवं आर्थिक विकास निगम श्रीमती सुधा चौधरी तथा परियोजना संचालक आईसीडीएस श्री ज्ञानेश्वर पाटिल सहित विभागीय अधिकारीगण बैठक में मौजूद थे।
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