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Wednesday, January 6, 2010

समय पर दवा न देने पर काली सूची में दर्ज होंग

आवंटित बजट का अस्सी प्रतिशत उपयोग जिला स्तर पर होगा

नई दवा नीति पूर्णत: विकेंद्रीकृत होगी। दवा, उपकरण और अन्य सामग्रियों के क्रय का कुल बजट की अस्सी प्रतिशत राशि का व्यय जिला स्तर पर होगा। दवा प्रदाय से लेकर भुगतान तक की संपूर्ण प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है .
जिसके अनुसार अगर दवा, उपकरण या सामग्री विक्रेता पैंतालीस दिन में प्रदाय नहीं करता तो उससे पेनाल्टी वसूल कर उसे काली सूची में दर्ज किया जाएगा और अगर क्रयकर्ता अधिकारी ने समय पर याने तीस दिन में भुगतान नहीं किया तो उससे ब्याज की राशि वसूली जाएगी।
नई दवा नीति में गुणवत्ता पूर्ण दवाई, समय पर उसकी उपलब्धता और दवा, उपकरण प्रदायकर्ता को समय पर भुगतान की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। इसके लिए मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक एक ऐसी व्यवस्था होगी जिसमें कभी भी दवा की कमी न होने पाएगी। इसके लिए जिला स्तर पर जबावदेह अधिकारी एक बार में तीन माह की दवाई का स्टाक रखेगा उसके अनुसार क्रय आदेश होंगे।
इसके साथ ही मौसमी बीमारियों में लगने वाली दवाईयों या सामग्रियों का भी क्रय आदेश देते समय ध्यान रखा जाएगा। जैंसे ही दवाओं की प्रदायगी होगी उस दिनांक से तीन दिन के अंदर औषधि और सामग्रियों की गुणवत्ता जांचने के लिये नमूने अधिकृत प्रयोगशालाओं को भेजे जांएगे।
इन प्रयोगशालाओं को तमिलनाडु मेडीकल सप्लाईर् कार्पोरेशन को चिन्हाकिंत करने की जिम्मेदारी दी गई है।  गुणवत्ता परीक्षण का व्यय दवा देने वाली इकाई ही वहन करेगी। अगर जांच में औषधि या सामग्री निर्धारित गुणवत्ता से कम पाई जाएगी तो प्रदायकर्ता ईकाई को पूरे बैच की औषधि या सामग्री को बदलना होगा या उसके मूल्य के बराबर बैंक ड्राफ्ट संबंधित आदेशकर्ता के नाम से जमा करना होगा।
नई दवा नीति में निर्धारित क्रय प्रक्रिया के अनुसार औषधि, सामग्री और उपकरण मद में उपलब्ध बजट की अस्सी प्रतिशत राशि का उपयोग मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन तथा अन्य क्रयकर्ता अधिकारी द्वारा किया जाएगा। शेष बीस प्रतिशत बजट का उपयोग केंद्रित क्रय पद्धति के माघ्यम से होगा। वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन माह तक अगर बीस प्रतिशत बजट का उपयोग नहीं हुआ तो यह बजट भी जिलों को दे दिया जाएगा।
निविदाओं की दरें निर्धारित करने के लिए तीन समितियां होगी पहली तकनीकी समिति जो स्पेसीफिकेशन एवं तकनीकी मूल्यांकन करेगी। दूसरी निर्णायक समिति होगी जिसका दायित्व निविदाओं को खोलना एवं तुलनात्मक पत्रक तैयार कर दर प्रस्तुत करना होगा। तीसरी दर निर्धारण समिति होगी जिसका दायित्व दरों के निर्धारण में अंतिम निर्णय लेना होगा।  इन समितियों में संबंधित संस्थाओं के उच्च अधिकारियों के अलावा समिति के अध्यक्ष आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को बुला सकेंगे।
नई दवा नीति में दवा के प्रदाय समय पर हो इसके लिए विशेष प्रावधान रखे गए है। समय-सीमा पर दवा प्रदाय न करने पर 0.5 प्रतिशत प्रतिदिन के मान से अधिकतम 7.5 प्रतिशत तक पैंतालिस से साठ दिनों के लिए कटौती की जाएगी। साठ दिनों में भी अगर दवा उपलब्ध नहीं कराई जाती तो बीस प्रतिशत के मान से पेनाल्टी की कटौती की जाएगी और आदेश स्वत: निरस्त माना जाएगा।
इसके बाद वैकल्पिक सूची में अनुमोदित फर्मों से संबंधित दवा क्रय की जाएगी। नई दवा नीति में भुगतान समय पर हो इसकी भी समय सीमा तय की गई है। नीति के अनुसार दवा प्रदायकर्ता ने सभी निर्धारित मानदंडों का ध्यान रखा है तो गुणवत्ता मानक प्रतिवेदन प्राप्त होने के तीन दिन में भुगतान करने की जबाबदारी संबंधित क्रयकर्ता अधिकारी की होगी। भुगतान में विलंब होने पर कोई न्यायालयीन प्रकरण बनता है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय कर ब्याज की राशि उनसे वसूल कर दवा, उपकरण या सामग्री प्रदायकर्ता को दी जाएगी।

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