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Tuesday, January 12, 2010

मंथन की अनुशंसाओं पर अमल 31 मार्च तक

 मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा उच्चस्तरीय बैठक में तत्परता से कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने आज 'मंथन 2009' की सिफारिशों पर अमल की समय-सीमा निर्धारित की तथा सभी मंत्रिमंडलीय सहयोगियों तथा सभी विभागों के प्रमुख सचिवों एवं सचिवों से समय सीमा में अमल सुनिश्चित करने के लिये कहा।मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में वित्त मंत्री श्री राघव जी, उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जनसंपर्क एवं संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, वन मंत्री श्री सरताज सिंह, सहकारिता मंत्री श्री गौरी शंकर बिसेन, पर्यटन एवं खेल मंत्री श्री तुकोजीराव पवार, महिला एवं बालविकास मंत्री श्रीमती रंजना बघेल, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण राज्यमंत्री श्री हरीशंकर खटीक और स्वास्थ्य राज्यमंत्री श्री महेंद्र हार्डिया तथा मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक के बाद मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से अलग से भी चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यशाला मंथन, 2009 के अंतर्गत स्वर्णिम मध्यप्रदेश के निर्माण के लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए शासन की सात सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को चिह्नांकित कर सात समूह बनाये गये थे- अधोसंचना, निवेश वृद्धि, कृषि को फायदे का धंधा बनाना, शिक्षा और स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण तथा सुशासन एवं संसाधन विकास। इन सात समूहों द्वारा 686 अनुशंसाएं प्रस्तुत की गयीं। इन अनुशंसाओं को चार श्रेणियों में बांटकर प्रत्येक विभाग को क्रियान्वयन रोड मैप तैयार करने हेतु निर्देशित किया गया है। यह चार श्रेणियां हैं-तत्काल लागू करने योग्य अनुशंसाएं, अनुशंसाएं जिनके लिये नियम/अधिनियम में संशोधन आवश्यक है, अनुशंसाएं जिनके लिये अतिरिक्त वित्तीय स्त्रोत आवश्यक हैं तथा ऐसी अनुशंसाएं जिनके क्रियान्वयन में कठिनाई है। उपरोक्त आधार पर सभी विभागों द्वारा अपना प्रस्तुतिकरण मंत्रिमंडल के समक्ष दिया गया । मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि इस प्रस्तुतिकरण के पश्चात विभागवार कुल अनुशंसाएं 940 हैं, जिनमें से मान्य अनुशंसाएं 852 तथा अमान्य अनुशंसाएं 88 हैं। एक ही अनुशंसा पर कई विभागों द्वारा अमल के कारण कुल अनुशंसाओं की संख्या बढ़कर 940 हो गयी थी। कठिनाई वाली तथा असहमति वाली सभी अनुशंसाओं को रद्द कर दिया गया है।

श्री चौहान ने कहा कि प्रत्येक विभाग यह सुनिश्चित करे कि जो अनुशंसाएं तत्काल लागू किये जाने पर सहमति बनी है उनके संबंध में तत्काल कार्यवाही प्रांरभ कर दी जाए। इस श्रेणी की अनुशंसाओं पर आगामी 31 मार्च तक अमल सुनिश्चित किया जायेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे अनुशंसाएं जिनमें अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है, के लिये संबंधित विभाग वित्त विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आगामी बजट में आवश्यक प्रावधान कराने हेतु प्राथमिकता से कार्रवाही करेंगे। यह कार्रवाई विधानसभा के आगामी बजट सत्र तक पूरी कर ली जानी चाहिये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे अनुशंसाएं जिनके लिये नियमों में संशोधन आवश्यक है, के संबंध में सभी विभाग कार्यवाही प्रारंभ कर दें तथा यह सुनिश्चित करें कि आगामी 15 अप्रैल तक यह कार्य पूर्ण हो जाए। जिन अनुशंसाओं पर अमल के लिये कानूनों में संशोधन आवश्यक है उनके संबंध में विधानसभा में आगामी बजट सत्र में तथा शेष में आगामी मानसून सत्र तक कार्रवाही पूरी की जाना है।

सुशासन समूह द्वारा अनेक अनुशंसाएं सभी विभागों के लिये सामान्य रूप से की गयी है तथा इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिशा-निर्देश भी जारी किये गये हैं। सभी विभाग इनका पालन सुनिश्चित करायें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मंथन की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा उनके द्वारा नियमित रूप से सी.एम.मानीटरिंग में की जायेगी। अत: सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि मंथन 2009 की जिन अनुशंसाओं पर सहमति बनी है तथा जो रोड मैप तैयार हुआ है उसके अनुरूप क्रियान्वयन तत्काल प्रांरभ हो जाए।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गरीबों के कल्याण से संबंधित सभी कार्यक्रमों पर तेजी से अमल सुनिश्चित किया जाना चाहिये। अकारण निर्णय लंबित नहीं रखे जाना चाहिये। मंथन की जिन सिफारिशों पर अमल में कठिनाई हो उनके संबंध में तत्काल जानकारी दी जानी चाहिये। जिससे कठिनाईयों का निराकरण किया जा सके। बजट संबंधी कठिनाईयों के संबंध में वित्त विभाग से चर्चा की जानी चाहिये तथा मुख्यमंत्री सचिवालय को अवगत कराना चाहिये। उन्होंने विभिन्न पंचायतों के निर्णयों तथा अन्य घोषणाओं पर तेजी से अमल सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पूरी तैयारी कर परिणाममूलक कार्यक्रमों को ही शुरू किया जाना चाहिये। सभी विभागों को आबंटित बजट का पूरा-पूरा उपयोग सुनिश्चित करना है तथा जो राशि उपयोग में नहीं आनी हो उसे तत्काल वापिस किया जाना चाहिये जिससे समय रहते उसका उपयोग विकास के लिये दूसरे विभागों द्वारा किया जा सके।

उन्होंने केंद्रीय मंत्रालयों में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिये भी तत्परता से कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।

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