प्रदेश में 55 रक्तकोष के माध्यम से एक लाख यूनिट रक्त एकत्रित
एड्स के खतरे से समाज को बचाने एवं सुरक्षित रखने के लिए समाज के जिम्मेदार लोग आगे आएं और एड्स के खिलाफ संयुक्त संघर्ष अभियान छेड़ें। यह अपील लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, जैव विविधता एवं प्रौद्योगिकी तथा जन-शिकायत निवारण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने की। श्री मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में एड्स से बचाव एवं जागरूकता लाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक अभियान छेड़ा है तथा ठोस कदम उठाए हैं।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में एड्स के बचाव के लिए चलाए जा रहे रक्त सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 55 रक्तकोष कार्यरत हैं जिनसे अभी तक एक लाख अठारह हजार 838 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया जिसमें स्वैच्छिक रक्तदान से 99 हजार 525 यूनिट रक्त शामिल है। श्री मिश्रा ने बताया कि एड्स के खतरे के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है।जिसमें आकाशवाणी, दूरदर्शन के अलावा गोष्ठी, सेमिनार, चिन्हांकित क्षेत्रों में तथा युवाओं आदि में जागृति लाने तथा उन्हें एड्स से बचाव के लिए जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। एड्स बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए जेल, महिला बाल विकास, पंचायत एवं उच्च शिक्षा विभाग के साथ मिलकर संयुक्त गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में 58 एस.टी.डी. क्लीनिक के माध्यम से 48 हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया गया एवं एड्स कार्यक्रम को स्वास्थ्य कार्यक्रमों का ही एक हिस्सा बनाकर जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को भी इसकी जिम्मेदारी दी गई है। परिवार नियोजन के साधनों के माध्यम से एड्स रोकने के लिए प्रदेश में एक करोड़ के लगभग बचाव के साधन वितरित किए गए। एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्रों के माध्यम से 128 आय.सी.टी.सी. केन्द्रों में 67 हजार से अधिक एच.आय.व्ही. की जांच की गई।
स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में 58 एस.टी.डी. क्लीनिक के माध्यम से 48 हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया गया एवं एड्स कार्यक्रम को स्वास्थ्य कार्यक्रमों का ही एक हिस्सा बनाकर जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को भी इसकी जिम्मेदारी दी गई है। परिवार नियोजन के साधनों के माध्यम से एड्स रोकने के लिए प्रदेश में एक करोड़ के लगभग बचाव के साधन वितरित किए गए। एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्रों के माध्यम से 128 आय.सी.टी.सी. केन्द्रों में 67 हजार से अधिक एच.आय.व्ही. की जांच की गई।
शिशुओं को एड्स संक्रमण से बचाने के लिए प्रदेश के पांच चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रिवेंशल ऑफ पेरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन केन्द्र स्थापित किए गए हैं जिनमें एच.आई.व्ही. पॉजिटिव 59 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं का परीक्षण कर शिशुओं को संक्रमण से बचाने के उपाय किए गए।
एड्स मरीजों को नि:शुल्क इलाज एवं दवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थापित ए.आय.टी. केन्द्रों से 3028 एड्स रोगियों को दवा उपलब्ध कराई गई। कम्युनिटी केयर सेंटर प्रदेश में सात स्थापित किए गए हैं जहां एड्स पीड़ित व्यक्तियों को दवाओं के प्रभाव की निगरानी मनोवैज्ञानिक सहायता, पोषण आहार संबंधी मदद की जाती है। उन्हें इसके लिए सेंटर में 5 से 15 दिन तक भर्ती रखा जाता है।
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