काम में मनाही पड़ेगी भारी, अत्यावश्यक सेवा का बंदोबस्त, होगी कानूनी कार्रवाई
राज्य सरकार ने चिकित्सा और स्वास्थ्य प्रशासन में कसावट लाने के मकसद से इनकी सेवाओं पर नकेल डाल दी है। आज इस सिलसिले में जारी निर्देश में उसने साफ किया है कि इन महकमों के अमले को अब काम में मनाही या कोताही करना भारी पड़ जाएगा।
इस अनुशासन को यथार्थ की कसौटी पर अंजाम देने के लिए दोषी के खिलाफ बाकायदा कानूनी कार्रवाई का बंदोबस्त किया गया है। यह फैसला इन सेवाओं को अत्यावश्यक घोषित किए जाने के चलते किया गया है।
चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई हैं।
चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई हैं।
बीते वक्त में खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी शिकायतों से दो-चार होना सामान्य बात थी जबकि कोई डॉक्टर, कम्पाउण्डर या अन्य कर्मचारी ड्यूटी पर गैरहाजिर मिले। और तो और ऐसा कर्मचारी कोई भी हीला-हवाला देकर काम में मनाही करें या फिर मरीज से दुर्व्यवहार कर बैठे। इन्हीं दुष्प्रवृत्तियों को रोकने राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को अत्यावश्यक घोषित करने का अहम फैसला भी किया।
राज्य सरकार का ताजा निर्देश अत्यावश्यक सेवा के फैसले को असल में ज़ामा पहनाने के मकसद पर टिका है। इस संबंध में माना गया है कि अनुशासन की मंशा बगैर कड़ी कार्रवाई के पूरी नहीं हो सकेगी। इसीलिए लापरवाह और गैरजिम्मेदार अमले पर मध्यप्रदेश अत्यावश्यक सेवा संधारण और विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत कार्रवाई का मन बना लिया गया है।
राज्य सरकार का ताजा निर्देश अत्यावश्यक सेवा के फैसले को असल में ज़ामा पहनाने के मकसद पर टिका है। इस संबंध में माना गया है कि अनुशासन की मंशा बगैर कड़ी कार्रवाई के पूरी नहीं हो सकेगी। इसीलिए लापरवाह और गैरजिम्मेदार अमले पर मध्यप्रदेश अत्यावश्यक सेवा संधारण और विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत कार्रवाई का मन बना लिया गया है।
सरकार ने यह साफ किया है कि उसके इस कानूनी कदम के दायरे में प्रदेश के सभी चिकित्सा, दंत चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी महाविद्यालय तथा उनसे जुड़े अस्पताल भी शामिल होंगे। इसी तरह सारे सरकारी चिकित्सालय, औषधालय, स्वास्थ्य केन्द्र और स्वास्थ्य शिक्षा संस्थानों पर यह फैसला लागू होगा।
मरीजों के लिए यह खुशगवार बात है कि उन्हें इलाज में अब चिकित्सा स्टाफ के किसी नकारात्मक रवैये का सामना नहीं करना पड़ेगा। दूसरी तरफ ऐसी हिमाकत के चलते और सजाओं के साथ ही स्टॉफ की नौकरी पर भी बन सकती है।
मरीजों के लिए यह खुशगवार बात है कि उन्हें इलाज में अब चिकित्सा स्टाफ के किसी नकारात्मक रवैये का सामना नहीं करना पड़ेगा। दूसरी तरफ ऐसी हिमाकत के चलते और सजाओं के साथ ही स्टॉफ की नौकरी पर भी बन सकती है।
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