अभियोजक निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर
भोपाल के आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में अभियोजन अधिकारियों के चौथे समूह प्रशिक्षण सत्र के समापन अवसर पर न्यायमूर्ति श्री नारायणसिंह आजाद ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि यदि समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना हो तो अपराध स्वयंमेव कम हो जावेंगे किन्तु ऐसा संभव न होने से लागतार बढ़ते रहेंगे।
अपराधों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक हैं कि अभियोजन की भूमिका निष्पक्ष हो। पुलिस अपराध के अनुसंधान में आवश्यक सावधानी बरतते हुये वैंधानिक कार्यवाही करें।
न्यायमूर्ति श्री आजाद ने कहा कि अभियोजक निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें एवं तथ्य की खोज के लिये न्यायालय में सहयोग प्रदान करें। ऐसा करने से समाज में अपराधों की रोकथाम में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, वहीं दूसरी और प्रजातंत्र की सफलता का मूलभूत उद्देश्य भी पूरा होगा।
न्यायमूर्ति श्री आजाद ने कहा कि अभियोजक निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें एवं तथ्य की खोज के लिये न्यायालय में सहयोग प्रदान करें। ऐसा करने से समाज में अपराधों की रोकथाम में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, वहीं दूसरी और प्रजातंत्र की सफलता का मूलभूत उद्देश्य भी पूरा होगा।
समापन सत्र में प्रशिक्षण ले रहे अभियोजन अधिकारियों ने न्यायमूर्ति श्री नारायण सिंह आजाद से वैधानिक कार्यवाही के संबंध में अपनी समस्याओं को सामने रखकर समाधान प्राप्त किया। अधिकारीगणों ने अपने कर्तव्यों के निष्पक्ष निर्वहन के लिये सामूहिक शपथ भी लीं। लोक अभियोजन संचालक श्री नवलकिशोर गर्ग ने प्रशिक्षण के उद्देश्य के बारे में बताया। इस मौके पर प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किये गये।
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