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Monday, November 30, 2009

शांति एवं समृद्धि के लिए बुद्ध के मार्ग पर चलें : श्री लक्ष्मीकांत शर्मा

साँची वार्षिकोत्सव आयोजन को मिलेगा अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप

शांति एवं समृद्धि बुद्ध के मार्ग पर चलकर आयेगी। देश में व्याप्त आतंकवाद, नक्सलवाद, अराजकता के माहौल में बुद्ध के बताये मार्ग पर चलकर ही शांति, समृद्धि व अहिंसा प्राप्त हो सकती है। यह विचार आज साँची में आयोजित चैत्यगिरि बिहार 57वें वार्षिकोत्सव में जनसंपर्क, संस्कृति एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने व्यक्त किये।
श्री शर्मा ने कहा कि साँची व भीमबैठिका जैसी दो-दो विश्व धरोहर रायसेन जिले में हैं। पुरातत्व विभाग के सहयोग से इनकी और ख्याति अर्जित हो सके, ऐसे प्रयास किये जायेंगे। विदिशा के उदेश्वर मंदिर को भी विश्व स्तरीय ख्याति दिलाने के प्रयास किए जायेंगे।
उन्होंने बताया कि साँची के कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने के लिए अगले वर्ष से इसको भव्यता प्रदान की जायेगी। यह कार्यक्रम तीन दिवसीय होगा। इसी कड़ी में आज से तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव प्रारंभ किया जा रहा है। जिसमें देशी एवं विदेशी कलाकार अपने नृत्य व नाटकों की प्रस्तुति करेंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक भी आयोजित की जायेगी। विदेशी श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलें इसके लिए प्रदेश सरकार हर-संभव मदद करेगी। हवाई पट्टी की स्थापना के लिए जमीन खोजी जा रही है।
इस अवसर पर श्री शर्मा ने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एवं सांसद श्रीमती सुषमा स्वराज के शुभकामना संदेश का वाचन भी किया। श्रीमती स्वराज ने अपने संदेश में कहा कि सांसद के नाते साँची क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए सभी तरह से प्रयास किए जायेंगे।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में कहा कि शांति की प्रतीक साँची प्रदेश व समस्त विश्व की धरोहर है। इसे सजाना-संवारना हमारा कर्तव्य है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक के पुत्र महेन्द्र व पुत्री संघमित्रा यहीं से श्रीलंका गये थे। जहां उन्होंने महात्मा बुद्ध के संदेश को प्रसारित व प्रचारित किया। हमारे लिए प्रसन्नता की बात है कि उसी राज्य श्रीलंका के धर्मानुरागी लोग साँची के श्रृंगार व विकास में बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। महाबौद्ध सभा के अध्यक्ष पूज्य श्री वानगल उपतिस्स नायक थेरो के नेतृत्व में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें आश्वस्त करते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार उनके सकारात्मक कार्यों में सदैव उनके साथ है। अगले वर्ष यह उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होगा। बौद्ध विश्वविद्यालय के लिए जमीन सहित सभी सुविधाएं दी जायेंगी। भविष्य में यह विश्वविद्यालय नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालय की तरह ख्याति अर्जित कर सकेगा। साँची से शांति व सद्भावना का संदेश विश्व के हर कोने में पहुंचे, ऐसी उन्होंने कामना की है।
साँची के विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि साँची मेला प्रतिवर्ष नवम्बर माह के चौथे रविवार को आयोजित किया जाता है। आगामी वर्षों में यह और अधिक सफलता प्राप्त कर सकेगा।
अपने उद्बोधन में वानगल उपतिस्स नायक थेरो ने कहा कि हम 57वां वार्षिक उत्सव मना रहे हैं। यह उत्सव 1952 से प्रारंभ हुआ इसका उद्घाटन स्व. पं. जवाहर लाल नेहरू ने किया था। भगवान बुद्ध के शिष्य के अवशेषों को अंग्रेजों ने सौ वर्ष तक अपने पास रखा जो बाद में महाबोधि सोसायटी के अनुरोध पर सौंपे गए। सम्राट अशोक के पुत्र-पुत्री ने बौद्ध धर्म का प्रचार कार्य साँची से किया था। विश्व के सभी देशों में बौद्ध लोगों के लिए साँची महत्वपूर्ण स्थल है।
श्री थेरो ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि अगले वर्ष से साँची वार्षिकोत्सव तीन दिन का होगा। जिसमें सरकार द्वारा बौद्ध देशों में निमंत्रण भेजा जायेगा। बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना से बौद्ध धर्म व दर्शन के अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में ताइवान के चीस्विगलुई महाथेरो सिंकदराबाद, गुणरत्न थेरो एवं महाबोधि सोसायटी के प्रबंधक श्री डी.पी. सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। ताइवान के श्री चिस्विग ने श्री लक्ष्मीकांत शर्मा को आलेख भेंट किया।
महाबोधि सोसायटी ने वार्षिकोत्सव के आयोजन में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए पुरातत्व विभाग के तीन गाइडों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इसके अलावा प्रतिभाशाली बच्चों कु. प्रिया राठौर, कु. संजू राजभर, कु. सुमन मीणा, श्री गोविंद सिंह गौर को दो-दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के अंत में श्री चंद्रबोधि पाटिल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन श्री कमलेश बहादुर ने किया। इस दौरान भोपाल कमिश्नर डॉ. पुखराज मारू, पुलिस उप महानिरीक्षक श्रीमती अनुराधा शंकर सिंह, कलेक्टर श्रीमती सुनीता त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक श्री आई.पी. कुलश्रेष्ठ एवं बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी उपस्थित थे।

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