मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि नदियों सहित जल स्त्रोतों को प्रदूषण मुक्त बनाने और उनके संरक्षण के लिये सरकार और समाज की ओर से संयुक्त अभियान की आवश्यकता है। प्रदेश की जीवन रेखा माँ नर्मदा को शुद्ध, स्वच्छ और पवित्र रखते हुए उसके प्रवाह को बनाये रखने के लिये सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
राज्य सरकार नर्मदा समग्र न्यास जैसी संस्थाओं को इस तरह के प्रयासों के लिये पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज शाम शिवाजी नगर में नर्मदा समग्र न्यास के नवनिर्मित भवन 'नदी का घर' के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं अपितु एक पाठशाला भी है जो प्रदेशवासियों को संस्कार देती है। मध्यप्रदेश के साथ अब यह गुजरात की भी जीवन रेखा हो गई है। नर्मदा जल को वैज्ञानिक दृष्टि से अपेक्षाकृत कम प्रदूषित माना गया है। नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के पास भी निर्माण आदि न हों इसके लिये भी सजग रहने की आवश्यकता है।
यह कार्य सरकार और जनता दोनों को करना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने नर्मदा परिक्रमा पथ बनाने का निर्णय लिया था, जिसका कार्य पूरा किया जायेगा। श्री चौहान ने नदियों को साफ-स्वच्छ रखने के साथ ही पर्वतों-पहाड़ों के संरक्षण और अवैध उत्खन्न रोकने के लिये भी अभियान चलाने की बात कही।
राष्ट्रवादी विचारक और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रमुख श्री के.एस. सुदर्शन ने कहा कि आज समन्वयात्मक विकास की अवधारणा पर कार्य होना चहिये। प्रकृति के प्रमुख तत्वों के प्रति आम जनता का सम्मान हो। ग्राम आधारित, अल्प पूंजी से प्रांरभ, अल्प ऊर्जा के उपयोग, रोजगारदायी और प्रकृति से सुसंगत जीवन रचना के प्रयासों से विकास को मूर्तरूप दिया जाये। इस दिशा में सबसे पहले पानी के अपव्यय को रोकना होगा। श्री सुदर्शन ने नर्मदा नदी से संबंधित महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंगों की भी चर्चा की।
चर्चित कृति 'सौन्दर्य की नदी नर्मदा' के लेखक, दो बार सम्पूर्ण नर्मदा की परिक्रमा कर चुके, नर्मदा समग्र न्यास के अध्यक्ष श्री अमृतलाल वेगड़ ने कहा कि नर्मदा के तटों पर सघन वृक्षारोपण होना चाहिये। वृक्ष नर्मदा के जल स्तर में वृद्धि करते हैं।
इसी तरह नर्मदा में नालों के माध्यम से जा रहे प्रदूषण को भी रोकना होगा। श्री वेगड़ ने हरियाली चुनरी जैसे प्रयासों को जनभागीदारी से गति देने की जरूरत बताई। श्री वेगड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। नर्मदा समग्र न्यास की ओर से राज्य सभा सदस्य एवं नर्मदा नदी से संबंधित अनुसंधान से दीर्घ अवधि से जुड़े श्री अनिल माधव दवे ने कहा कि नर्मदा समग्र न्यास देश की इस विशिष्ट नदी के संरक्षण के लिये कार्य कर रहा है।
न्यास के नवनिर्मित भवन में नर्मदा पर आधारित स्थायी चित्र प्रदर्शनी होगी। इसके अलावा न्यास समय-समय पर जनजागृति के माध्यम से प्रकृति से मनुष्य को जोड़ने और प्राकृतिक सम्पदा के संरक्षण के लिये गतिविधियां आयोजित करता रहेगा।
श्री दवे ने बताया कि इस वर्ष गोवर्धन पूजा के रूप में बांद्राभान में विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों की आराधना होगी। न्यास की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में नागरिकगण सहभागी हो सकेंगे। लोकार्पण समारोह को श्री उत्तम स्वामी जी ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर 'नदी का घर' का विधिवत लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में सांसद श्री कैलाश जोशी, राज्य मंत्रिपरिषद के अनेक सदस्य, गुफा मंदिर के महंत स्वामी चन्द्रमादास एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और नागरिक काफी संख्या में उपस्थित थे।
राज्य सरकार नर्मदा समग्र न्यास जैसी संस्थाओं को इस तरह के प्रयासों के लिये पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज शाम शिवाजी नगर में नर्मदा समग्र न्यास के नवनिर्मित भवन 'नदी का घर' के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं अपितु एक पाठशाला भी है जो प्रदेशवासियों को संस्कार देती है। मध्यप्रदेश के साथ अब यह गुजरात की भी जीवन रेखा हो गई है। नर्मदा जल को वैज्ञानिक दृष्टि से अपेक्षाकृत कम प्रदूषित माना गया है। नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के पास भी निर्माण आदि न हों इसके लिये भी सजग रहने की आवश्यकता है।
यह कार्य सरकार और जनता दोनों को करना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने नर्मदा परिक्रमा पथ बनाने का निर्णय लिया था, जिसका कार्य पूरा किया जायेगा। श्री चौहान ने नदियों को साफ-स्वच्छ रखने के साथ ही पर्वतों-पहाड़ों के संरक्षण और अवैध उत्खन्न रोकने के लिये भी अभियान चलाने की बात कही।
राष्ट्रवादी विचारक और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रमुख श्री के.एस. सुदर्शन ने कहा कि आज समन्वयात्मक विकास की अवधारणा पर कार्य होना चहिये। प्रकृति के प्रमुख तत्वों के प्रति आम जनता का सम्मान हो। ग्राम आधारित, अल्प पूंजी से प्रांरभ, अल्प ऊर्जा के उपयोग, रोजगारदायी और प्रकृति से सुसंगत जीवन रचना के प्रयासों से विकास को मूर्तरूप दिया जाये। इस दिशा में सबसे पहले पानी के अपव्यय को रोकना होगा। श्री सुदर्शन ने नर्मदा नदी से संबंधित महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंगों की भी चर्चा की।
चर्चित कृति 'सौन्दर्य की नदी नर्मदा' के लेखक, दो बार सम्पूर्ण नर्मदा की परिक्रमा कर चुके, नर्मदा समग्र न्यास के अध्यक्ष श्री अमृतलाल वेगड़ ने कहा कि नर्मदा के तटों पर सघन वृक्षारोपण होना चाहिये। वृक्ष नर्मदा के जल स्तर में वृद्धि करते हैं।
इसी तरह नर्मदा में नालों के माध्यम से जा रहे प्रदूषण को भी रोकना होगा। श्री वेगड़ ने हरियाली चुनरी जैसे प्रयासों को जनभागीदारी से गति देने की जरूरत बताई। श्री वेगड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। नर्मदा समग्र न्यास की ओर से राज्य सभा सदस्य एवं नर्मदा नदी से संबंधित अनुसंधान से दीर्घ अवधि से जुड़े श्री अनिल माधव दवे ने कहा कि नर्मदा समग्र न्यास देश की इस विशिष्ट नदी के संरक्षण के लिये कार्य कर रहा है।
न्यास के नवनिर्मित भवन में नर्मदा पर आधारित स्थायी चित्र प्रदर्शनी होगी। इसके अलावा न्यास समय-समय पर जनजागृति के माध्यम से प्रकृति से मनुष्य को जोड़ने और प्राकृतिक सम्पदा के संरक्षण के लिये गतिविधियां आयोजित करता रहेगा।
श्री दवे ने बताया कि इस वर्ष गोवर्धन पूजा के रूप में बांद्राभान में विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों की आराधना होगी। न्यास की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में नागरिकगण सहभागी हो सकेंगे। लोकार्पण समारोह को श्री उत्तम स्वामी जी ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर 'नदी का घर' का विधिवत लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में सांसद श्री कैलाश जोशी, राज्य मंत्रिपरिषद के अनेक सदस्य, गुफा मंदिर के महंत स्वामी चन्द्रमादास एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और नागरिक काफी संख्या में उपस्थित थे।
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