मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण एवं ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय व्यावसायिक ऊर्जा की बढ़ती हुई मांग और विद्युत उत्पादन के सीमित संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुये विद्युत की मांग और पूर्ति के बढ़ते अंतर को कम करने की दृष्टि से लिया गया है।
ऊर्जा संरक्षण और उसके दक्षतापूर्ण उपयोग के तरीकों को अनिर्वाय रूप से लागू करने के प्रथम चरण में व्यावसायिक और औद्योगिक इकाइयों की आवश्यकता की न्यूनतम 25 प्रतिशत बिजली की पूर्ति सौर गर्म जल संयंत्र के माध्यम से एक वर्ष के भीतर अनिवार्य की जायेगी। इनमें वे निजी एवं शासकीय अस्पताल, परिचर्या गृह, होटेल्स, मोटेल्स/विश्रामगृह, भोजनालय एवं जलपान गृह, केन्टीन शामिल हैं जिनकी पूंजीगत लागत 50 लाख रूपये से अधिक हो और जहां पर गर्म जल का उपयोग किया जाता है।
शासकीय और शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों आदि के नये भवनों एवं नये क्रय में परम्परागत बिजली बल्बों को प्रतिबंधित करते हुये ऊर्जा दक्ष लाइटिंग (सीएलएफ, ऊर्जा दक्ष ट्यूब, एलईडी बेस्ड लाईट्स, इलेक्ट्रानिक बेलास्ट/रेग्युलेटर) का उपयोग अनिवार्य किया जायेगा। शासकीय और शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों, नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, सहकारी संस्थाओं, हाऊसिंग सोसायटी डेवलपर, समस्त बोर्ड, प्राधिकरण निगम आदि में ऊर्जा दक्ष पंपसेट/मोटर/वाल्व आदि का उपयोग अनिवार्य किया जायेगा।
भविष्य में शासकीय और शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों के भवनों की डिजाईन एवं संकल्पना, ऊर्जा दक्ष किये जाने की अनिवार्यता होगी।
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों और डिमाण्ड साईड मैनेजमेंट के उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिवच/सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय डिमाण्ड साईड मैनेजमेंट कमेटी गठित की जायेगी। यह समिति कार्यक्रम की प्रगति की नियमित समीक्षा और समन्वय करेगी। समिति द्वारा समय-समय पर उचित दिशा निर्देश जारी किये जायेंगे।
समिति में सामान्य प्रशासन, वित्त, उद्योग, आवास एवं पर्यावरण, सार्वजनिक उपक्रम, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति, नर्मदा घाटी विकास विभाग के प्रतिनिधि, ऊर्जा विकास निगम के एमडी के अलावा पॉवर ट्रांसमिशन, पॉवर जनरेटिंग और तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों के सीएमडी सदस्य होंगे।
गौरतलब है कि ऊर्जा संरक्षण एवं ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता को देखते हुये केन्द्र सरकार द्वारा ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत राज्य शासन को ऊर्जा संरक्षण एवं उसके दक्षतापूर्ण उपयोग के संबंध में किसी भी व्यक्ति/उपभोक्ता/प्राधिकारी को लिखित निर्देश जारी करने के अधिकार प्राप्त हैं, जिसका पालन करने के लिये वे बाध्य होंगे।
ऊर्जा संरक्षण और उसके दक्षतापूर्ण उपयोग के तरीकों को अनिर्वाय रूप से लागू करने के प्रथम चरण में व्यावसायिक और औद्योगिक इकाइयों की आवश्यकता की न्यूनतम 25 प्रतिशत बिजली की पूर्ति सौर गर्म जल संयंत्र के माध्यम से एक वर्ष के भीतर अनिवार्य की जायेगी। इनमें वे निजी एवं शासकीय अस्पताल, परिचर्या गृह, होटेल्स, मोटेल्स/विश्रामगृह, भोजनालय एवं जलपान गृह, केन्टीन शामिल हैं जिनकी पूंजीगत लागत 50 लाख रूपये से अधिक हो और जहां पर गर्म जल का उपयोग किया जाता है।
शासकीय और शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों आदि के नये भवनों एवं नये क्रय में परम्परागत बिजली बल्बों को प्रतिबंधित करते हुये ऊर्जा दक्ष लाइटिंग (सीएलएफ, ऊर्जा दक्ष ट्यूब, एलईडी बेस्ड लाईट्स, इलेक्ट्रानिक बेलास्ट/रेग्युलेटर) का उपयोग अनिवार्य किया जायेगा। शासकीय और शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों, नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, सहकारी संस्थाओं, हाऊसिंग सोसायटी डेवलपर, समस्त बोर्ड, प्राधिकरण निगम आदि में ऊर्जा दक्ष पंपसेट/मोटर/वाल्व आदि का उपयोग अनिवार्य किया जायेगा।
भविष्य में शासकीय और शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों के भवनों की डिजाईन एवं संकल्पना, ऊर्जा दक्ष किये जाने की अनिवार्यता होगी।
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों और डिमाण्ड साईड मैनेजमेंट के उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिवच/सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय डिमाण्ड साईड मैनेजमेंट कमेटी गठित की जायेगी। यह समिति कार्यक्रम की प्रगति की नियमित समीक्षा और समन्वय करेगी। समिति द्वारा समय-समय पर उचित दिशा निर्देश जारी किये जायेंगे।
समिति में सामान्य प्रशासन, वित्त, उद्योग, आवास एवं पर्यावरण, सार्वजनिक उपक्रम, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति, नर्मदा घाटी विकास विभाग के प्रतिनिधि, ऊर्जा विकास निगम के एमडी के अलावा पॉवर ट्रांसमिशन, पॉवर जनरेटिंग और तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों के सीएमडी सदस्य होंगे।
गौरतलब है कि ऊर्जा संरक्षण एवं ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता को देखते हुये केन्द्र सरकार द्वारा ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत राज्य शासन को ऊर्जा संरक्षण एवं उसके दक्षतापूर्ण उपयोग के संबंध में किसी भी व्यक्ति/उपभोक्ता/प्राधिकारी को लिखित निर्देश जारी करने के अधिकार प्राप्त हैं, जिसका पालन करने के लिये वे बाध्य होंगे।
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