प्रशासन अकादमी के सभागार में आज मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की उपस्थिति में मंथन-2009 के अंतर्गत 'सुरक्षा, कानून-व्यवस्था' कार्यदल द्वारा प्रस्तुत अपनी अनुशंसाओं के प्रस्तुतीकरण के बाद उन पर चर्चा हुई। इस चर्चा के आधार पर कार्यदल के अध्यक्ष और सचिव द्वारा अनुशंसाओं को अंतिम रूप दिया जाकर शासन को प्रस्तुत किया जायेगा।
इस अवसर पर मंत्री परिषद के सदस्य सर्वश्री अनूप मिश्रा, जयंत कुमार मलैया, रामकृष्ण कुसमरिया, गोपाल भार्गव, अर्चना चिटनीस, जगदीश देवड़ा, नागेन्द्र सिंह, करणसिंह वर्मा, रंजना बघेल, पारस जैन, देवीसिंह सैय्याम, राजेन्द्र शुक्ल, के.एल. अग्रवाल और नारायणसिंह कुशवाह भी उपस्थित थे। कार्यदल ने अपनी 50 से अधिक अनुशंसाओं को संस्थागत और प्रशासनिक व्यवस्था, मानव संसाधन, वित्तीय एवं अन्य संसाधन, सुरक्षा हेतु आवश्यक प्रबंधन, समाज की अपेक्षाएं, बेक टू बेसिक्स और विविध विषय के अंतर्गत वर्गीकृत कर प्रस्तुत किया।
इस कार्यदल में मार्गदर्शक के रूप में गृह मंत्री श्री जगदीश देवड़ा शामिल थे।
इसके अलावा प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री संदीप खन्ना, प्रमुख सचिव गृह श्री राजन कटोच, प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग श्री सत्य प्रकाश, प्रमुख सचिव विधि-विधायी कार्य श्री एन.के. गुप्ता, सचिव पंचायत-ग्रामीण विकास श्री अजय मिश्रा, संचालक लोक अभियोजन श्री नवलकिशोर गर्ग, संचालक खाद्य श्री अजीत केसरी, प्रबंध संचालक अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम श्री रघुवीर श्रीवास्तव, ए.डी.जी. फायर सर्विसेज श्री पी.एल. पांडे, ए.डी.जी. योजना श्री व्ही. एम. कंवर, आई.जी. एस.ए.एफ. श्री सुखराज सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री एच.एस. पावला, वन संरक्षक कटनी वन मंडल श्री एस. मजुमदार, आई.जी. एस.टी.एफ. श्री मैथिलीशरण गुप्ता, पुलिस अधीक्षक राजगढ़ डॉ. आशा माथुर, सी.ई.ओ. जिला पंचायत विदिशा श्री एम.एल. कौरव, संभाग आयुक्त शहडोल श्री अरूण तिवारी, कलेक्टर सीधी, मंदसौर, बालाघाट, शहडोल, श्योपुर और सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री एस.आर. मोहंती कार्यदल में शामिल थे।
कार्यदल की प्रमुख अनुशंसाएं इस प्रकार हैं :-
संस्थागत एवं प्रशासनिक व्यवस्था
पुलिस स्थापना बोर्ड का सुदृढ़ीकरण।
आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक के जिला संवर्ग को जोनल/प्रादेशिक संवर्ग बनाया जाना।
पुलिस अधिकारियों एवं दण्डाधिकारी के लिये साल भर स्थानांतरण पर प्रतिबंध की व्यवस्था में ढील।
कानून व्यवस्था एवं अनुसंधान का पृथकीकरण।
ग्राम न्यायालय की व्यवस्था को सशक्त करने हेतु वांछित सहयोग।
संज्ञेय एवं गैर संज्ञेय अपराधों को पुन: परिभाषित किया जाये।
अभियोजन एवं अनुसंधान के बीच बेहतर तालमेल एवं समन्वय।
गंभीर प्रकरणों का जिला मानीटरिंग मेकेनिज्म के तहत 6 माह में निराकरण।
भूमि संबंधी प्रकरणों का त्वरित निराकरण।
दहेज संबंधी अत्याचार के प्रकरणों में दहेज प्रतिषेध अधिकारियों को क्रियाशील करना।
जेल व्यवस्था का सुधार एवं सुदृढ़ीकरण।
मानव संसाधन
प्रदेश के पुलिस बल में मापदण्ड के अनुसार 5 साल में पूर्ति। मैदानी बल को आवश्यक प्रशिक्षण के लिये बजट प्रावधान। पुलिस बल के प्रशिक्षकों को विशेष प्रोत्साहन भत्ता।
प्रदेश भर में स्पेशल टास्क फोर्स के कार्य के मद्देनजर विशेष प्रोत्साहन भत्ता।
नक्सली एवं अन्य कठिन क्षेत्रों में कार्य करने वाले अमले के लिये विशेष वेतन-भत्ते एवं अन्य सुविधाएं।
पुलिस अधिकारियों की कठिन क्षेत्रों में पदस्थापना के लिये एक निश्चित समयावधि।
वित्तीय एवं अन्य संसाधन
इस अवसर पर मंत्री परिषद के सदस्य सर्वश्री अनूप मिश्रा, जयंत कुमार मलैया, रामकृष्ण कुसमरिया, गोपाल भार्गव, अर्चना चिटनीस, जगदीश देवड़ा, नागेन्द्र सिंह, करणसिंह वर्मा, रंजना बघेल, पारस जैन, देवीसिंह सैय्याम, राजेन्द्र शुक्ल, के.एल. अग्रवाल और नारायणसिंह कुशवाह भी उपस्थित थे। कार्यदल ने अपनी 50 से अधिक अनुशंसाओं को संस्थागत और प्रशासनिक व्यवस्था, मानव संसाधन, वित्तीय एवं अन्य संसाधन, सुरक्षा हेतु आवश्यक प्रबंधन, समाज की अपेक्षाएं, बेक टू बेसिक्स और विविध विषय के अंतर्गत वर्गीकृत कर प्रस्तुत किया।
इस कार्यदल में मार्गदर्शक के रूप में गृह मंत्री श्री जगदीश देवड़ा शामिल थे।
इसके अलावा प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री संदीप खन्ना, प्रमुख सचिव गृह श्री राजन कटोच, प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग श्री सत्य प्रकाश, प्रमुख सचिव विधि-विधायी कार्य श्री एन.के. गुप्ता, सचिव पंचायत-ग्रामीण विकास श्री अजय मिश्रा, संचालक लोक अभियोजन श्री नवलकिशोर गर्ग, संचालक खाद्य श्री अजीत केसरी, प्रबंध संचालक अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम श्री रघुवीर श्रीवास्तव, ए.डी.जी. फायर सर्विसेज श्री पी.एल. पांडे, ए.डी.जी. योजना श्री व्ही. एम. कंवर, आई.जी. एस.ए.एफ. श्री सुखराज सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री एच.एस. पावला, वन संरक्षक कटनी वन मंडल श्री एस. मजुमदार, आई.जी. एस.टी.एफ. श्री मैथिलीशरण गुप्ता, पुलिस अधीक्षक राजगढ़ डॉ. आशा माथुर, सी.ई.ओ. जिला पंचायत विदिशा श्री एम.एल. कौरव, संभाग आयुक्त शहडोल श्री अरूण तिवारी, कलेक्टर सीधी, मंदसौर, बालाघाट, शहडोल, श्योपुर और सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री एस.आर. मोहंती कार्यदल में शामिल थे।
कार्यदल की प्रमुख अनुशंसाएं इस प्रकार हैं :-
संस्थागत एवं प्रशासनिक व्यवस्था
पुलिस स्थापना बोर्ड का सुदृढ़ीकरण।
आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक के जिला संवर्ग को जोनल/प्रादेशिक संवर्ग बनाया जाना।
पुलिस अधिकारियों एवं दण्डाधिकारी के लिये साल भर स्थानांतरण पर प्रतिबंध की व्यवस्था में ढील।
कानून व्यवस्था एवं अनुसंधान का पृथकीकरण।
ग्राम न्यायालय की व्यवस्था को सशक्त करने हेतु वांछित सहयोग।
संज्ञेय एवं गैर संज्ञेय अपराधों को पुन: परिभाषित किया जाये।
अभियोजन एवं अनुसंधान के बीच बेहतर तालमेल एवं समन्वय।
गंभीर प्रकरणों का जिला मानीटरिंग मेकेनिज्म के तहत 6 माह में निराकरण।
भूमि संबंधी प्रकरणों का त्वरित निराकरण।
दहेज संबंधी अत्याचार के प्रकरणों में दहेज प्रतिषेध अधिकारियों को क्रियाशील करना।
जेल व्यवस्था का सुधार एवं सुदृढ़ीकरण।
मानव संसाधन
प्रदेश के पुलिस बल में मापदण्ड के अनुसार 5 साल में पूर्ति। मैदानी बल को आवश्यक प्रशिक्षण के लिये बजट प्रावधान। पुलिस बल के प्रशिक्षकों को विशेष प्रोत्साहन भत्ता।
प्रदेश भर में स्पेशल टास्क फोर्स के कार्य के मद्देनजर विशेष प्रोत्साहन भत्ता।
नक्सली एवं अन्य कठिन क्षेत्रों में कार्य करने वाले अमले के लिये विशेष वेतन-भत्ते एवं अन्य सुविधाएं।
पुलिस अधिकारियों की कठिन क्षेत्रों में पदस्थापना के लिये एक निश्चित समयावधि।
वित्तीय एवं अन्य संसाधन
- पुलिस बल के लिये वाहनों की कमी एवं संचार व्यवस्था में सुधार की आवश्यक व्यवस्था।
- थानों के लिये पर्याप्त लेखन सामग्री एवं अन्य मूलभूत संसाधनों के लिये आवश्यक वित्तीय प्रावधान।
- पुलिस की मैदानी संस्थाओं में मौलिक आवश्यकताओं के लिये पर्याप्त बजट की उपलब्धता।
सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को आयोजना विषय (प्लान सब्जेक्ट) के रूप में सम्मिलित करना।
प्रमुख विभागों के बजट में सुरक्षा व्यवस्था हेतु एक प्रतिशत राशि प्रावधानित करना।
पुलिस बल में उपलब्धता बढ़ाने हेतु अर्दली भत्ते की व्यवस्था की जाये ताकि कम खर्च में पुलिस की उपलब्धता में अत्यधिक वृद्धि हो सके।
सुरक्षा के लिये आवश्यक प्रबंधन
प्रदेश में एक प्रतिबद्ध राज्य व्यापी सुरक्षा नेटवर्क हो। यह नेटवर्क अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित हो तथा इसमें सभी विभागों की सुरक्षा आवश्यकता का समावेश हो।
वन विभाग की भांति पुलिस बल के लिये भी आधुनिक तकनीकी संचार साधन उपलब्ध हों।
प्रदेश के पुलिस बल के सभी अधिकारियों की संचार व्यवस्था हेतु क्लोज्ड़ यूजर ग्रुप प्रणाली का उपयोग।
प्रदेश के हर प्रमुख शहर के मास्टर प्लान में सुरक्षा कम्पोनेंट का प्रावधान एवं पुलिस की सहभागिता।
विकास परियोजनाओं/योजनाओं में वांछित सुरक्षा कम्पोनेंट की व्यवस्था एवं नियमों में सुरक्षा के लिये आवश्यक प्रावधान।
इलेक्ट्रानिक सर्विलेंस का अधिक से अधिक उपयोग एवं इसके लिये नियमों में प्रावधान।
सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक तकनीकी उन्नयन हेतु बजट में अत्यधिक वृद्धि करना।
आम जनता को व्यापक रूप से कानून एवं नागरिक जवाबदारियों के संबंध में प्रेरित करना।
प्रत्येक थाने का कम्प्युटरीकरण कर उसे स्टेट सिक्योरिटी नेट से जोड़ा जाये।
सूचना तंत्र को प्रभावी करने के लिये पृथक से दक्ष एवं सुसज्जित संवर्ग।
समाज की अपेक्षाएं
प्रदेश में जन-सामान्य में सुरक्षा से संबंधित विश्वास पैदा करना।
थानों में सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण।
सामान्य व्यक्ति द्वारा बिना असुविधा के थाने में प्रकरण का पंजीयन।
प्रत्येक थाने में एक थाना सहयोगी समिति स्थापित की जाये। थाने के कार्यकलापों में सुझाव एवं जन-सामान्य की मदद यह समिति करें।
अपराधों का उन्मुख पंजीयन हों व इनको छिपाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जाये।
सभी जिलों में कंट्रोल रूप की स्थापना की जाये एवं 100 नम्बर पर शिकायतों के ई-पंजीयन एवं उचित रिस्पॉन्स के मॉनीटरिंग की व्यवस्था की जाये।
सामाजिक संस्थान जैसे मंदिर, मस्जिद, बैंक आदि में निजी सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिये, ताकि पुलिस बल इससे मुक्त हो सके।
पात्र आवेदकों को शस्त्र लायसेंस के प्रदाय की व्यवस्था का सरलीकरण।
मूलभूत
कोटवार प्रथा का सुदृढ़ीकरण किया जाये एवं थानों में आने वाली सूचना का पूर्व की भांति विस्तृत परीक्षण कर कार्यवाही की जाये।
कानून व्यवस्था की स्थिति में उपलब्ध संसाधनों एवं उपयुक्त बल का विश्लेषण कर कार्यवाही की जाये। ऐसी स्थिति में सही ब्रीफिंग, आवश्यक तैयारी, समय पर पहुंचना एवं उचित संवाद सुनिश्चित किया जाये।
बीट सिस्टम को और प्रभावी एवं कारगर बनाने के लिये आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था।
जनता का विश्वास अर्जित करने के लिये पुलिस की गश्त एवं निरीक्षण व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण।
जिले से लेकर ग्राम स्तर तक राजस्व एवं पुलिस विभाग में प्राथमिकता पर समन्वय की स्थापना।
प्रत्येक जिले में सभी विभागों में समन्वय समिति स्थापित कर जनता की समस्याएं एवं कानून-व्यवस्था से संबंधित विषयों पर निरंतर विचार-विमर्श एवं निर्णय देने की व्यवस्था को संस्थागत किया जाये।
पुलिस और राजस्व अधिकारियों द्वारा संयुक्त एवं नियमित दौरा, निरीक्षण एवं रात्रि विश्राम की संस्थागत व्यवस्था।
धारा 107, 110, 116, 144, 145, 151 सी.आर.पी.सी., जिला बदर, रासुका जैसी सभी प्रतिबंधात्मक धाराओं का प्रभावी उपयोग, प्रशिक्षण एवं मांनीटरिंग की व्यवस्था।
विविध बिन्दु
कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्था में मैदानी अधिकारियों को दण्ड देने से पूर्व संक्षिप्त प्रारंभिक जाँच का प्रावधान।
कंजर, पारदी एवं सिकलीगर जैसे समाजों के लिये संबंधित विभाग की मदद से आर्थिक पुनर्वास हेतु नोडल विभाग / अधिकारी की व्यवस्था।
स्वतंत्र भारत में पुलिस की बदली हुई जिम्मेदारी एवं स्वरूप के संबंध में जन-सामान्य में आवश्यक पब्लिक एजुकेशन।
ट्रैफिक नियम व्यवस्था, सामाजिक व्यवहार एवं अन्य सुरक्षा संबंधित विषयों पर आई.ई.सी. के प्रावधान के साथ-साथ पाठ्य-पुस्तकों के माध्यम से जन-चेतना।
प्रमुख विभागों के बजट में सुरक्षा व्यवस्था हेतु एक प्रतिशत राशि प्रावधानित करना।
पुलिस बल में उपलब्धता बढ़ाने हेतु अर्दली भत्ते की व्यवस्था की जाये ताकि कम खर्च में पुलिस की उपलब्धता में अत्यधिक वृद्धि हो सके।
सुरक्षा के लिये आवश्यक प्रबंधन
प्रदेश में एक प्रतिबद्ध राज्य व्यापी सुरक्षा नेटवर्क हो। यह नेटवर्क अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित हो तथा इसमें सभी विभागों की सुरक्षा आवश्यकता का समावेश हो।
वन विभाग की भांति पुलिस बल के लिये भी आधुनिक तकनीकी संचार साधन उपलब्ध हों।
प्रदेश के पुलिस बल के सभी अधिकारियों की संचार व्यवस्था हेतु क्लोज्ड़ यूजर ग्रुप प्रणाली का उपयोग।
प्रदेश के हर प्रमुख शहर के मास्टर प्लान में सुरक्षा कम्पोनेंट का प्रावधान एवं पुलिस की सहभागिता।
विकास परियोजनाओं/योजनाओं में वांछित सुरक्षा कम्पोनेंट की व्यवस्था एवं नियमों में सुरक्षा के लिये आवश्यक प्रावधान।
इलेक्ट्रानिक सर्विलेंस का अधिक से अधिक उपयोग एवं इसके लिये नियमों में प्रावधान।
सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक तकनीकी उन्नयन हेतु बजट में अत्यधिक वृद्धि करना।
आम जनता को व्यापक रूप से कानून एवं नागरिक जवाबदारियों के संबंध में प्रेरित करना।
प्रत्येक थाने का कम्प्युटरीकरण कर उसे स्टेट सिक्योरिटी नेट से जोड़ा जाये।
सूचना तंत्र को प्रभावी करने के लिये पृथक से दक्ष एवं सुसज्जित संवर्ग।
समाज की अपेक्षाएं
प्रदेश में जन-सामान्य में सुरक्षा से संबंधित विश्वास पैदा करना।
थानों में सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण।
सामान्य व्यक्ति द्वारा बिना असुविधा के थाने में प्रकरण का पंजीयन।
प्रत्येक थाने में एक थाना सहयोगी समिति स्थापित की जाये। थाने के कार्यकलापों में सुझाव एवं जन-सामान्य की मदद यह समिति करें।
अपराधों का उन्मुख पंजीयन हों व इनको छिपाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जाये।
सभी जिलों में कंट्रोल रूप की स्थापना की जाये एवं 100 नम्बर पर शिकायतों के ई-पंजीयन एवं उचित रिस्पॉन्स के मॉनीटरिंग की व्यवस्था की जाये।
सामाजिक संस्थान जैसे मंदिर, मस्जिद, बैंक आदि में निजी सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिये, ताकि पुलिस बल इससे मुक्त हो सके।
पात्र आवेदकों को शस्त्र लायसेंस के प्रदाय की व्यवस्था का सरलीकरण।
मूलभूत
कोटवार प्रथा का सुदृढ़ीकरण किया जाये एवं थानों में आने वाली सूचना का पूर्व की भांति विस्तृत परीक्षण कर कार्यवाही की जाये।
कानून व्यवस्था की स्थिति में उपलब्ध संसाधनों एवं उपयुक्त बल का विश्लेषण कर कार्यवाही की जाये। ऐसी स्थिति में सही ब्रीफिंग, आवश्यक तैयारी, समय पर पहुंचना एवं उचित संवाद सुनिश्चित किया जाये।
बीट सिस्टम को और प्रभावी एवं कारगर बनाने के लिये आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था।
जनता का विश्वास अर्जित करने के लिये पुलिस की गश्त एवं निरीक्षण व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण।
जिले से लेकर ग्राम स्तर तक राजस्व एवं पुलिस विभाग में प्राथमिकता पर समन्वय की स्थापना।
प्रत्येक जिले में सभी विभागों में समन्वय समिति स्थापित कर जनता की समस्याएं एवं कानून-व्यवस्था से संबंधित विषयों पर निरंतर विचार-विमर्श एवं निर्णय देने की व्यवस्था को संस्थागत किया जाये।
पुलिस और राजस्व अधिकारियों द्वारा संयुक्त एवं नियमित दौरा, निरीक्षण एवं रात्रि विश्राम की संस्थागत व्यवस्था।
धारा 107, 110, 116, 144, 145, 151 सी.आर.पी.सी., जिला बदर, रासुका जैसी सभी प्रतिबंधात्मक धाराओं का प्रभावी उपयोग, प्रशिक्षण एवं मांनीटरिंग की व्यवस्था।
विविध बिन्दु
कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्था में मैदानी अधिकारियों को दण्ड देने से पूर्व संक्षिप्त प्रारंभिक जाँच का प्रावधान।
कंजर, पारदी एवं सिकलीगर जैसे समाजों के लिये संबंधित विभाग की मदद से आर्थिक पुनर्वास हेतु नोडल विभाग / अधिकारी की व्यवस्था।
स्वतंत्र भारत में पुलिस की बदली हुई जिम्मेदारी एवं स्वरूप के संबंध में जन-सामान्य में आवश्यक पब्लिक एजुकेशन।
ट्रैफिक नियम व्यवस्था, सामाजिक व्यवहार एवं अन्य सुरक्षा संबंधित विषयों पर आई.ई.सी. के प्रावधान के साथ-साथ पाठ्य-पुस्तकों के माध्यम से जन-चेतना।
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