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Tuesday, February 16, 2010

नियमित कर्मचारियों से बोनस वापस लेने की तैयारी

दो माह से नहीं मिला मानदेय
सागर. डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में नियमित कर्मचारियों से बोनस वापस लेने के निर्णय के बीच यहां कार्यरत दैनिक वेतनभोगी  अथवा अकुशल श्रमिक  के मानदेय में कटौती की तैयारी हो रही है। जिससे कर्मचारियों में आक्रोश है।
इन दोनों मुद्दों को लेकर विवि अशैक्षणिक कर्मचारी संघ बुधवार को कुलसचिव को ज्ञापन देगा। संघ के अध्यक्ष डॉ. केके राव ने बताया कि विवि प्रशासन ने स्वयं निर्णय लेकर कर्मचारियों को लगभग 28 लाख रुपए बोनस दिया था। लेकिन अब इसे वापस लेने का निर्णय लिया है। बुधवार को कुलसचिव से भेंटकर ज्ञापन देंगे और पूछा जाएगा कि क्या बोनस वापस लेने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान से कोई पत्र आया है या नहीं?
क्योंकि जब भी कर्मचारी इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी लेते हैं तो उन्हें संतोषप्रद जवाब नहीं दिया जाता है। दूसरा सवाल यह है कि पुराने प्रशासन ने क्या आयोग की अनुमति के बगैर बोनस बांटा था? गौरतलब है कि कर्मचारियों से वचन-पत्र लेकर बोनस बांटा गया था। अब कर्मचारी और विवि प्रशासन आमने-सामने हैं। बोनस वापस लिए जाने के निर्णय से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या किसी दवाब के तहत पूर्व में बोनस बांटा गया था। कर्मचारियों के एक गुट का कहना है कि विवि प्रशासन को कोई भी निर्णय लेने से पहले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से गाइड लाइन लेना चाहिए।
दो माह से नहीं मिला मानदेय
विवि में लगभग तीन सौ कैजुएल लेबर कार्यरत हैं। इनमे से स्व वित्तीय  पाठ्यक्रम  चलाने वाले विभागों में कार्यरत श्रमिकों  को छोड़कर किसी को भी दो माह से मानदेय नहीं मिला है। क्योंकि वित्त विभाग के पास इनको दिए जाने वाले मानदेय के लिए अलग से कोई फंड नहीं है। मानदेय न मिलने से इनके लिए रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। कई लेबर जिन्हें पूर्व में डेली बेसिस कर्मचारी कहा जाता था यहां दस-दस साल से कार्य कर रहे हैं।

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Saturday, December 26, 2009

एजाज को मिली डॉक्ट्रेट की उपाधि


' मानव का स्वरूप और नियति'  विषय पर
सागर। डॉ० हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय ने मोहम्मद एजाज खान को भगवत गीता व कुरआन के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर ' मानव का स्वरूप और नियति'  विषय पर प्रस्तुत शोध प्रबंध पर डॉ० ऑफ फिलॉसफी की उपाधि प्रदान की है।
एजाज ने अपना शोध दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो० एपी दुबे के निर्देशन में पूरा किया है। इस अवसर पर उनके मित्रों व सहपाठियों- मनुज नामदेव, हित अग्रवाल, अशोक अहिरवार, श्याम तिवारी ने बधाई दी है।

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Wednesday, September 30, 2009

वियाग्रा पर भी भारी पड़ सकते हैं वाजीकरण रसायन

सागर।PTI-भाषा !  कामशक्ति बढ़ाने व यौन जीवन को खुशहाल बनाने का दावा करने वाली दवाओं का बाजार दुनिया भर में तेजी से फैलता जा रहा है। इसमें से आधे से कुछ कम हिस्सा जड़ी-बूटी आधारित दवाओं का है।
वैज्ञानिक प्रमाणन के अभाव में भारत की आयुर्वेदिक दवाएं इस बाजार में अपना जलवा नहीं दिखा पा रही हैं, लेकिन सागर विश्वविद्यालय में चल रहा शोध कार्य भारत को इस बाजार का सिरमौर बनने की राह दिखा सकता है।

डा. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर विनोद दीक्षित ने बताया कि आयुर्वेद में जीवन में यौवन की उमंग-तरंग को बरकरार रखने के लिए वाजीकरण रसायन के सेवन को जरूरी बताया गया है। ऐसे रसायनों के सेवन से शरीर में वाजी यानी अश्व के समान ताकत पैदा हो सकती है।
उन्होंने बताया कि हालांकि बाजार में ऐसे रसायनों को कामशक्ति बढ़ाने व यौन जीवन को खुशहाल बनाने का दावा करने वाली दवाओं के रूप में बेचा जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के अभाव में ए दवाएं देशी व विदेशी बाजार में अपेक्षित लोकप्रियता हासिल नहीं कर पा रही हैं। हमारा शोध इसी कमी को पूरा करने की दिशा में है और यह अपनी तरह का पहला शोध है।
प्रो. दीक्षित के निर्देशन में वाजीकरण रसायन के फाइटोकेमिकल एवं फार्मोकोलाजिकल प्रभाव विषय पर शोध कर रहे छात्र नागेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि फिलहाल उनका शोध सफेद मूसली, ताल मखाना, अकरकरा, साजन मिश्री, साजन पंजा व शिवलिंगी नामक औषधीय पौधों पर केन्द्रित है।
चौहान ने बताया कि अब तक के शोध निष्कर्ष व चूहों पर किए गए प्रयोगों से यह पता चला है कि इन औषधीय घटकों में मानव शरीर के यौवन काल की उमंग-तरंग को लंबे समय तक बरकरार रखने की अद्भुत ताकत है। उन्होंने कहा कि भले ही इन पौधों से बनी दवाओं को कामशक्ति बढ़ाने व यौन जीवन को खुशहाल बनाने वाला बताकर बेचा जाता है परंतु ए जड़ी-बूटियां पूरे शरीर को सेहतमंद बनाने का काम करती हैं।
हाल ही में स्विटजरलैंड में आयोजित 57वीं इंटरनेशनल कांग्रेस एंड एनुअल मीटिंग आफ द सोसायटी फार मेडिसिनल प्लांट ऐंड नेचुरल प्रोडक्ट रिसर्च में 87 देशों से आए वैज्ञानिकों व शोधार्थियों के बीच सागर फार्मेसी विभाग के शोध छात्र नागेन्द्र के काम को काफी सराहा गया। उनके शोध पत्र को सर्वेश्रेष्ठ शोध प्रस्तुति का अवार्ड भी दिया गया। साथ ही उन्हें स्विटजरलैंड आने-जाने का व्यय-भत्ता भी दिया गया।
इसी शोध कार्य पर नेशनल फेलोशिप हासिल करने वाले चौहान ने बताया कि विभिन्न वाजीकरण रसायनों को मिलाकर एक नई औषधि की खोज की गई है, जिसका चूहों पर भी सफल प्रयोग किया जा चुका है व अगले चरण में मनुष्यों पर इसका प्रयोग होगा। उन्होने कहा कि इंसानों में इन रसायनों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में हजारों साल पहले से ही होता चला आ रहा है। नई ईजाद की गई दवा को पेटेंट कराने के लिए भी कोशिश चल रही है।
शोध कार्य के निदेशक प्रो. दीक्षित ने बताया कि वियाग्रा जैसी एलोपैथिक कामोत्तेजक दवाएं शरीर पर तेजी से मगर कुछ ही समय तक अपना असर दिखा पाती हैं, जबकि वाजीकरण रसायन शरीर की पूरी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के तहत ही काम शक्ति व यौन व्यवहार को बेहतर बनाते हैं। उनका असर लंबे समय तक बरकरार रहता है और उनका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। असल में आयुर्वेद महज कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए नहीं वरन संतुलित जीवन जीने व अच्छी संतानें पैदा करने के लिए इन रसायनों के सेवन की हिमायत करता है।
इसी सिलसिले में शोध छात्र चौहान ने बताया कि रसायनों के सेवन के बाद चूहों के केवल सेक्स हारमोन के स्त्राव में ही नही बल्कि शुक्राणुओं की संख्या, उनके जीवन काल व गतिविधियों में भी वृद्धि देखी गई। ए रसायन यौन व्यवहार के नियंत्रण में सहायक स्नायुतंत्र व रिसाव ग्रंथियों की कार्यप्रणाली पर भी सकारात्मक असर डालते हैं। इन दवाओं के सेवन से स्नायु तंत्र पर होने वाले प्रभावों का अध्ययन होना बाकी है लेकिन रिसाव ग्रंथियों पर पड़ने वाले प्रभाव की पुष्टि हो चुकी है।
शोध की अहमियत के बारे में विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के प्रो. दीक्षित ने बताया कि आयुर्वेदिक के वाजीकरण रसायनों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण का अभी तक कोई उल्लेख नहीं है। यह शोध जड़ी-बूटी आधारित दवाओं के विश्व बाजार में भारत की आयुष दवाओं के लिए सफलता के द्वार खोल सकता है।

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Thursday, August 27, 2009

अब अभिभावकों ने उठाए सवाल

सागर. डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के फॉर्मेसी विभाग में 22 अगस्त को हुई कथित रैंगिग का मामला अब उलझता नजर आ रहा है। इस मामले को लेकर अब आरोपी विद्यार्थियों के अभिभावकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। गुरुवार को अभिभावकों ने कुलपति प्रो एनएस गजभिए से भेंट की। उन्होंने आवेदन देकर आठ बिंदुओं का उल्लेख करते हुए जांच कराने की मांग की है। जांच नहीं होने पर अभिभावकों ने मानव अधिकार आयोग, महिला आयोग में जाने की चेतावनी दी है।
गौरतलब है कि 22 अगस्त को विवि के फॉर्मेसी विभाग के बीफॉर्म द्वितीय वर्ष के 16 विद्यार्थियों को कथित रैगिंग के आरोप में 15 दिन के लिए क्लास से निष्कासित किया गया था। इन विद्यार्थियों पर बीफॉर्म प्रथम वर्ष प्रथम सेमेस्टर की कक्षा में जाकर जूनियर विद्यार्थियों से परिचय के नाम पर कथित रैगिंग लेने का आरोप था। इसके बाद कुलपति ने सोमवार को जांच समिति गठित करके 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन जांच समिति ने बुधवार को दो दिन का समय मांग लिया। ताकि जांच में सभी तथ्य जुटाए जा सकें।
गुरुवार को अभिभावकों और कुलपति प्रो. गजभिए के बीच चर्चा हुई। कुलपति ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। चूंकि अभी समिति जांच कर रही है इसलिए समिति की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। अभिभावकों में एन नारायण ग्वालियर, माधोराव पांडे, सारनी बैतूल, रविकांत गुप्ता, अमरपाटन सतना, ऋषभ जैन विदिशा आदि शामिल थे।
क्या कहते हैं अभिभावक
बच्चों ने इस मामले में हम लोगों को जो बताया वही बात कुलपति के समक्ष रखी है। वह इस बात पर उचित निर्णय लें।
अक्षय जैन, जबलपुर
बच्चों का कहना है कि प्रायोजित तरीके से इस मामले को अंजाम दिया गया है। बच्चों के साथ न्याय हो, यही बात हमने कुलपति से कही है। न्यायसंगत जांच हो और कार्रवाई हो।
दिवाकर प्रसाद त्रिपाठी, रीवा
कुलपति से सौहार्द्रपूर्ण माहौल में हमरी चर्चा हुई। हमने बच्चों की भावनाओं से उन्हें अवगत कराया है। कुलपति ने कहा कि वह प्रॉक्टर से भी इस घटना की रिपोर्ट लेंगे।

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Tuesday, August 25, 2009

रैगिंग के मामले में राष्ट्रपति जांच की मांग

सागर/२५ अगस्त राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के नाम सागर विश्वविद्यालय के कुलपति को सौंपे ज्ञापन मे भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा ने २२ अगस्त को विवि के फार्मेसी विभाग मे सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर छात्रों के कथित परिचय लेने की घटना के रैंगिग या अनुशासनहीनता बताए जाने पर छिड़ी बहस को दरकिनार कर उच्चस्तरीय जांच कराने व दोषियों को कड ी सजा दिलाए जाने की मांग की है।
राष्ट्रपति के नाम भेजे ज्ञापन मे मोर्चे के जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने २२ अगस्त को विवि के फार्मेसी विभाग मे हुई घटना व उस पर विवि प्रशासन व पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्यवाही पर ही कई सवाल उठाए हैं।
ज्ञापन मे राष्ट्रपति महोदय से निवेदन किया गया है कि विवि प्रशासन से पूछा जाए कि अगर घटना रैंगिंग नहीं अनुशासनहीनता थी तो इन विद्यार्थियों को कई घण्टों तक पुलिस अभिरक्षा मे क्यों रखा गया। विवि ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के रैंगिंग रोकने संबंधी निर्देशोर्ं का पालन क्यों नहीं किया।
भाजयुमो ने राष्ट्रपति को संबोधित अपने ज्ञापन की प्रतिलिपियां मानव संसाधन मंत्रालय, यूजीसी के चेयरमेन, राष्ट्रीय महिला आयोग व जिला के प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजीं है। जिसमें उन्होने इस सारे मे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन व पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए राष्ट्रपति से उच्चस्तरीय जांच कराने व दोषियों के खिलाफ न्यायोचित कार्यवाही कराए जाने की मांग की है।
इस मामले में क्षेत्र के सांसद भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ने भी गंभीर चिंता जताई है। भाजयुमो द्वारा इस मामले को सांसद की जनचौपाल मे उठाए जाने पर सासंद ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय से रैंगिंग से जुड े समाचार आना चिंता का विषय है। ऐसी घटनाएं विवि मे दूरदराज से पढ ने आने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों मे चिंता को जन्म देतीं है। उन्होने कहा कि वे पृथक से भी इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के लिए केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को पत्र लिखेंगें।
इसी सिलसिले में फार्मेसी विभाग की घटना पर चारों तरफ से बढ़ते दबाव के चलते विश्वविद्यालय ने सोमवार को आनन-फानन मे घटना की जांच करने के लिए एक विशेष जांच समिति गठित कर दी है। विवि के जनसंपर्क अधिकारी प्रो० एपी दुबे के मुताबिक कुलपति एनएस गजभिए ने इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। प्रो० यूएस गुप्त को जांच समिति का चेयरमेन व चार अन्य शिक्षकों पीके खरे, एएन शर्मा, अर्चना मेहता, व आरपी मिश्रा को इसका सदस्य बनाया गया है। यह समिति ४८ घण्टे के अंदर अपनी रपट कुलपति को सौंपेगी।
गौरतलब है कि इस विशेष जांच समिति के गठन के पहले तक विवि का वही प्रोक्टोरियल बोर्ड २६ अगस्त को मामले की दोबारा जांच करने वाला था। जिसने विवि के फार्मेसी विभाग मे २२ अगस्त को हुई घटना मे अनुशासनहीनता का दोषी मानकर बीफार्म द्वितीय वर्ष के १६ विद्यार्थियों-जिनमें सात छात्राएं भी शामिल थीं- को १५ दिनों के लिए कक्षाओं से निष्काषित किए जाने का फरमान जारी किया था।

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Sunday, August 23, 2009

सागर विश्वविद्यालय में रैगिंग, 16 छात्र निष्कासित

सागर। डॉ। हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय कैम्पस में रैगिंग की खबर ने हलचल मचा दी। फॉर्मेसी विभाग में तोड़फोड़ हुई। तनाव के देखते हुए पुलिस बल तैनात करना पड़ा। बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ और मामला अनुशासनहीनता का सामने आया। कथित रैगिंग के 16 छात्र-छात्राओं को 15 दिन के लिए निष्कासित किया गया।
पुलिस ने 15 विद्यार्थियों को हिरासत में लेकर 4 घंटे से अधिक तक सिविल लाइंस थाना में अभिरक्षा में रखा। इनमें आठ छात्राएं शामिल थीं। शनिवार को दोपहर 12 बजे फॉर्मेसी विभाग में बीफॉर्म द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी बीफॉर्म प्रथम वर्ष प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों की क्लॉस में परिचय के नाम पर कथित रैगिंग ले रहे थे। यह सूचना कैंपस में आग की तरह फैल गई।
खबर मिलने पर तुरंत ही प्रॉक्टर आरपी गौतम व प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अन्य सदस्य फॉर्मेसी विभाग पहुंचे। क्लॉस का नजारा देखकर भौचक्के रह गए। जूनियर छात्र-छात्राएं सिर लटकाए बैठे थे। सीनियर छात्र उनके सामने खड़े थे। वे कथित रूप से जूनियर से परिचय ले रहे थे। बताया जाता है कि सीनियर ने जूनियर से आपत्तिजनक हरकत करवरई।
यह खबर सुनते ही कैंपस में सनसनी फैल गई। इस समय मुख्य प्रशासनिक भवन में कार्य परिषद की बैठक चल रही थी। जिसमें केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के सचिव सुशील कुमार भी मौजूद थे। कुछ छात्र नेताओं ने फॉर्मेसी विभाग में कथित रैगिंग की जानकारी मिलने पर दोपहर को विभाग में जाकर तोड़फोड़ कर दी।
जिससे कुछ समय के लिए यहां तनाव की स्थिति बन गई। दोपहर 12:30 बजे कैंपस में पुलिस बल तैनात कर दिया। कथित रैगिंग की जांच के लिए फॉर्मेसी विभाग की विभागीय समिति, प्रॉक्टोरियल बोर्ड और पुलिस की बैठक हुई। सिविल लाइन थाना के एसआई नवल आर्य ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला रैगिंग का न पाया जाकर अनुशासनहीनता का पाया गया।
जिस कारण पुलिस ने विभागीय जांच समिति एवं प्रॉक्टोरियल बोर्ड के लिखित आवेदन के बाद शाम 4:30 बजे सभी 15 आरोपी छात्र-छात्राओं को समझाइश देकर छोड़ दिया। प्रॉक्टर प्रो. गौतम का कहना है कि इस मामले की जांच प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा दोबारा की जाएगी। बुधवार को बोर्ड की बैठक होगी। बीफॉर्म प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के बयान लिए जाएंगे।
यदि यह मामला रैगिंग का पाया गया तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार दोषी विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सजा में अधिकतक 50 हजार का जुर्माना एवं एक साल के लिए विवि से निष्काषित किए जाने का प्रावधान है। बहरहाल विवि में इस प्रकार की घटनाएं होती रही हैं।
लेकिन यह पहला मौका है जब कथित रैगिंग के आरोप में एक साथ 15 विद्यार्थियों को प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा पुलिस के हवाले किया गया हो। प्रारंभ में यह मामला रैगिंग का ही बताया जा रहा था। लेकिन किन्हीं कारणों के चलते अनुशासनहीनता का बताया गया। इस मामले में विभागीय जांच समिति एवं अनुशासन समिति की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

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Thursday, August 20, 2009

हड्ताल के समर्थन में गांधीवादी तरीका अपनाने का आव्हान....

मप्र के पहले केन्द्रीय विश्वविद्यालय मे 'कुलसचिव हटाओ' की मांग को लेकर शिक्षक संघ द्वारा शुरू की गई सांकेतिक हड़ताल ने चौथे दिन एक नया मोड़ ले लिया है।हड़ताली शिक्षकों ने अब विश्वविद्यालय के कुलसचिव से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप मे किसी भी समय पीड़ित रहे लोगों से उनके समर्थन मे आगे आने का आव्हान किया है।
ऐसे लोगों से अपील की गई है कि या तो वे इस मुद्दे पर अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए गांधीवादी तरीके अपनाते हुए 'कुलसचिव हटाने विश्वविद्यालय बचाव' की मांग लेकर कुलपति को ग्रीटिंग काई, फूलों का गुलदस्ता भेंट करें।
लोग आंदोलन के समर्थन मे पत्र लिखकर भी हड़ताली शिक्षकों के प्रति समर्थन व्यक्त कर सकते हें।

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Wednesday, August 12, 2009

डॉ० गौर व्याख्यानमाला आज

मप्र के पहले केन्द्रीय विश्वविद्यालय डॉ० हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय मे बुधवार को डॉ० गौर व्याख्यानमाला का आयोजन किया जा रहा है। विवि के स्वर्ण जयंती सभागार मे शाम सात बजे आयोजित होने वाली इस व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता सेवानिवृत आईएएस आधिकारी, आलोचक व कवि अशोक वाजपेयी होगें। वाजपेयी 'साहित्य क्यों' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगें।
इस सिलसिले में डॉ० गौर व्याख्यानमाला के अध्यक्ष प्रो० सुरेश आचार्य ने बताया कि नगर छात्र समिति के तत्वावधान मे आयोजित हो रही इस व्याख्यानमाला में शहर के साहित्य प्रेमियों, विचारकों, पत्रकारों व सभी वर्ग के लोगों को आमांत्रित किया गया है।

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Friday, July 24, 2009

विवादों में घिरा केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर

सागर।भाषा। मध्यप्रदेश का पहला केन्द्रीय विश्वविद्यालय अपनी पहली कार्यकारिणी व अकादमिक परिषद के गठन के साथ ही विवादों में घिर गया है। बताया जा रहा है कि कुलपति कार्यालय को परिषदों के गठन के सिलसिले में मानव संसाधन विभाग से काफी पहले ही पत्र मिल चुका था, लेकिन उसने परिषदों के गठन की घोषणा मंत्रालय द्वारा दोबारा भेजे गए पत्र के मिलने के बाद ही की है। इससे परिषदों के गठन में एक माह से ज्यादा की देरी हो गई।
विवाद की शुरुआत केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर द्वारा जारी उस अधिसूचना के साथ हुई जिसके द्वारा उसने अपनी पहली कार्यकारिणी व अकादमिक परिषदों के गठन की औपचारिक घोषणा की है।
16 जुलाई को डा. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुल सचिव के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि परिषदों के गठन की घोषणा भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव से प्राप्त 19 मई के पत्र के अनुबंध के तहत विश्वविद्यालय की पहली कार्यकारिणी परिषद व अकादमिक परिषद का गठन किया जा रहा है जो 19 मई 2009 से प्रभाव से मानी जाएगी। अधिसूचना के जारी होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान लगाए जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय की नवगठित कार्यकारिणी के सदस्यों के बीच भी यह जानने के लिए सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि अगर विश्वविद्यालय को मंत्रालय से परिषदों के गठन के सिलसिले में पत्र काफी पहले भेजा जा चुका था तो उसने परिषदों के गठन की घोषणा उसी पत्र के दोबारा भेजे जाने के बाद ही क्यों की।
मानव संसाधन मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि 15 जनवरी 2009 को अध्यादेश के जरिए बनाए गए देश के 16 नए केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में तीन विश्वविद्यालयों- डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर व हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय को अपग्रेड किया था।
सूत्रों ने बताया कि इन तीनों विश्वविद्यालयों की पहली कार्यकारिणी व अकादमिक परिषदों के गठन के सिलसिले में 19 मई 2009 का मंत्रालय के अवर सचिव का हस्ताक्षरित पत्र भेजा गया था। सागर विश्वविद्यालय को छोड़कर शेष दो विश्वविद्यालयों में परिषदों की गठन की प्रक्रिया न केवल पूरी हो चुकी है, बल्कि वहां परिषदों ने काम करना भी शुरू कर दिया है।
इस सिलसिले में सागर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. अखिलेश्वर प्रसाद दुबे ने कुलपति प्रो. एनएस गजभिए के हवाले से बताया है कि दोनों ही पत्र विश्वविद्यालय को 15 जुलाई को प्राप्त हुए हैं। अधिसूचना में प्रूफ की गलती से ऐसा लग रहा है कि एक पत्र विश्वविद्यालय को पहले प्राप्त हुआ है।
लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की दलील लोगों के गले उतरती नहीं लग रही है। इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय की नवगठित कार्यकारी परिषद के सदस्य प्रो. बद्री प्रसाद ने भाषा को बताया कि अधिसूचना को देखकर आश्चर्य होता है विश्वविद्यालय की परिषदों के गठन की घोषणा के सिलसिले में एक ही मंत्रालय अपने दो अलग अलग अधिकारियों-अवर सचिव व निदेशक द्वारा एक ही पत्र को एक ही तारीख को क्यों भेजेगा।
प्रसाद का कहना है कि इस सारे मामले में कुलपति कार्यालय की भूमिका संदिग्ध लग रही है। उन्होंने कहा कि अगर मंत्रालय द्वारा भेजे जाने वाले पत्र के गायब होने की बात सही है तो कल को विश्वविद्यालय को किसी बड़ी ग्रांट या परियोजना के सिलसिले में प्रस्ताव मंगाए जाने वाले पत्र भी गायब हो सकते हैं तब विश्वविद्यालय को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस सारे विवाद के चलते सागर विश्वविद्यालय प्रशासन बचाव की भूमिका में नजर आने लगा है। विश्वविद्यालय परिसर में भी दबी जुबान से इस मामले पर चर्चा गर्म है कि अगर मंत्रालय स्तर के पत्रों को दबाने में भी प्रशासन के कारिंदों के दिल में डर नहीं रहा तो इस विश्वविद्यालय को भगवान ही बचा सकता है।

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Sunday, July 19, 2009

मप्र के पहले केन्द्रीय विवि की कार्यपरिषद गठित

मप्र के पहले केन्द्रीय विश्वविद्यालय डॉ० हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय की पहली कार्यपरिषद का गठन हो गया है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की सहमति से केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय नई दिल्ली ने विवि की नई कार्यपरिषद के सदस्यों के नामों की घोषणा कर दी है। मंत्रालय से सदस्यों के नामों की सूची गुरुवार शाम को सागर विवि के कुलपति कार्यालय को फैक्स द्वारा प्राप्त हुई।
डॉ० हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो० अखिलेश्वर प्रसाद दुबे ने कि मानव संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक सागर विश्वविद्यालय की ११ सदस्यीय कार्यपरिषद व अकादमिक परिषद का गठन कर दिया गया है।
दुबे ने बताया कि कार्यपरिषद मे पदेन सभापति के रुप में विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो० एनएस गजभिए, पदेन सदस्य मानव संसाधन विभाग के सचिव व मप्र उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, के अलावा महाराजपुर (छतरपुर) विधायक मानवेन्द्र सिंह, टीकमगढ़ के विधायक यादवेन्द्र सिंह, प्रो० केवल चंन्द जैन, प्रो० राम प्रसाद, सेवानिवृत्त प्रो० बद्री प्रसाद जैन, प्रो० आरके त्रिवेदी सागर विश्वविद्यालय के पूर्व व बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो० डीपी सिंह व प्रदीप गुप्ता को सदस्य मनोनीत किया गया है।
जबकि २१ सदस्यीय अकादमिक परिषद में सागर विवि के कुलपति व सह-उपकुलपति को क्रमशः पदेन सभापति व सदस्य के अलावा देशबंधु भोपाल के संपादक ललित सुरजन, कलकत्ता विवि के पूर्व कुलपति प्रो० आशीष कुमार बनर्जी, इलाहाबाद के जीबी पंत सोशल साईंस इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो० प्रदीप भार्गव, मिजोरम विवि के प्रो० आरपी तिवारी, कलकत्ता के भारतीय सांखियकी संस्थान के अर्थशास्त्री प्रो० मधुरा स्वामीनाथन, पूना विवि के पूर्व कुलपति प्रो० अशोक कोलास्कर, भोपाल के आईआईएसईआर के निदेशक प्रो० विनोद कुमार सिंह, भोपाल की नेशनल लॉ इस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी के प्रो० एस एस सिंह, मुबंई की एसएनडीटी वूमेन्स यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति प्रो० सुमा चिटनिस, यूजीसी के सदस्य प्रो० के० रामामूर्ति नायडू को सदस्य मनोनीत किया गया है।
जबकि सागर विवि से प्रो० एसके आचार्य, प्रो० एस बनर्जी, प्रो० आरएस ,कसाना, प्रो० एसके शुक्ला, प्रो० जीपी नेमा, प्रो० कुसुम भूरिया, प्रो० पीके राय व प्रो० गणेश शंकर को भी अकादमिक परिषद मे स्थान दिया गया है।
गौरतलब है कि कार्यपरिषद के गठन मे देरी होने की वजह से सागर विश्वविद्यालय के केन्द्रीय विश्वविद्यालय मे बदलाव व विकास की प्रक्रिया भी गति नहीं पकड़ पा रही थी। परिषद के गठन के साथ ही विवि के विकास के सिलसिले मे नीतिगत फैसले लेने का रास्ता भी साफ हो गया है।

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Wednesday, May 27, 2009

बीएड परीक्षा फिर लटकी अधर में...

सागर के डॉ० हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से संबंद्ध बीएड कॉलेजों की परीक्षाएं एक बार फिर अधर मे लटक गईं हैं।

सागर विवि के कुलपति के साथ बीएड कॉलेज संचालाकों की हुई बैठक के बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षाओं के स्थगित किए जाने का आदेश जारी कर दिया।
विवि से संबंद्ध 42 बीएड कॉलेजों के 4 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों का परीक्षाओं का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। उच्च न्यायालय में बीएड के सभी छात्रों की परीक्षाएं लिए जाने संबंधी हलफनामे पेश किए जाने के साथ ही इन परीक्षाओं पर रोक लग गई है।
बताया जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मान्य व अमान्य कॉलेजों के संबंद्ध मे स्थगन देने से यह हालात बने हैं। विवि प्रशासन का कहना है कि अब उच्च न्यायालय से मार्गनिर्देशन लेने के बाद ही इस संबंद्ध मे कोई निर्णय लिया जा सकता है।
इस सिलसिले मे कॉलेज संचालकों का यह तर्क था कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थगन के बाद कॉलेजों की मान्यता व अमान्यता के मामले मे यथास्थिति बनाए रखने का मामला बन गया है।
अत: विवि को अब सभी कॉलेजों की परीक्षाओं का आयोजन कराना चाहिए। लेकिन विवि प्रशासन का कहना है कि कानूनी सलाह लेने के बाद ही इस मामले मे कोई निर्णय लिया जाएगा।

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Sunday, May 10, 2009

भारत का गरम मसाला कर सकता है स्वाइन फ्लू का उपचार

सागर।भाषा। दुनिया भर में दहशत फैला रहे स्वाइन फ्लू को भारत के हर घर की रसोई में रोजाना उपयोग में आने वाले गरम मसाले के एक घटक से ही निपटा जा सकता है।

स्थानीय डा. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग के प्रोफेसर अजय शंकर मिश्रा ने बताया कि गरम मसाले का एक घटक 'स्टार एनाइस' ही वह पदार्थ है, जिससे टेमीफ्लू नामक एण्टी वायरल दवा बनाई जाती है। टेमीफ्लू को स्वाइन फ्लू से निपटने में सबसे ज्यादा कारगर उपचार माना जा रहा है।
मिश्रा ने बताया कि चीन में काफी पहले से ही इस दवा को सर्दी, खांसी व नाक-गले के संक्रमण के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता रहा है।
प्रो. मिश्र कहते हैं कि भारत और चीन के लोगों की रसोई में स्वाद बढ़ाने के लिए वर्षो से प्रयोग में लाए जा रहे मसालों में शामिल ''स्टार एनाइस'' ही वह पदार्थ है जो स्वाइन फ्लू वायरस के हमले से भारत और चीन के लोगों को बचाए रख सकता है।
उन्होंने कहा कि ''स्टार एनाइस'' नाम लोगों को नया लग सकता है, लेकिन हर प्रांत में यह अपने गुणों एवं अलग-अलग नाम से यह खूब जाना पहचाना जाता है। देश के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के स्पाइस बोर्ड आफ इंडिया के मुताबिक, ''स्टार एनाइस'' बड़े पैमाने पर दक्षिण-पूर्वी चीन और कम मात्रा में भारत के उत्तर पूर्वी प्रदेशों में सदाबहार झाडी के फूल के रूप में पैदा होता है।
इसे वनस्पति जगत में ''इलीसियम वेरम'' फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में फ्रक्टस एनिसी स्टेल्लटी, हिन्दी भाषा में कर्णफूल, अनासफल या वदियानी फूल, मलयालम में टेक्कोलम, मराठी में बदियान, उर्दू में बदियानी, तेलगू में अनासपूवू, तमिल में अनासूप्पू और अंग्रेजी भाषा में इंडियन एवं चाईनीज एनाईस के नाम से जाना जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय संस्था व‌र्ल्ड फण्ड के मध्यप्रदेश के सलाहकार प्रो. मिश्र बताते हैं कि हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ने भी चीन के स्वास्थ्य मंत्री चेन जून के हवाले से प्रसारित खबर में इस बात का उल्लेख किया है कि टेमीफ्लू एण्टीवायरल दवा का मुख्य घटक वही स्टार एनाइस है, जिसका प्रयोग भारतीय और चीनी रसोई में किया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत के हर शहर में किसी भी किराने की दुकान में यह कर्णफूल या वदियान फूल के नाम से मिल सकता है। सितारे के आकार की सात से आठ पंखुड़ियों के आकार का ''स्टार एनाइस'' स्वाद और खुशबू में सौंफ जैसा लगता है। उल्लेखनीय है कि अब तक 22 देश स्वाइन फ्लू यानि इनफ्लूएंजा ए .एच। एन। की चपेट में आ चुके हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, अब तक इस स्वाइन फ्लू के वायरस के संक्रमण के 1516 मामलों की आधिकारिक पुष्टि हुई है, जिनमें से 29 लोगों की मौत हो चुकी है। यह एक नया वायरस है और मनुष्यों में इसकी प्रतिरोधक क्षमता अब तक विकसित नहीं हुई है। इसीलिए इसके महामारी का रुप धारण करने का खतरा है।
फिलहाल दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश होगा जो अपने को एच। एन। वायरस के संक्रमण से पूरी तरह महफूज समझ रहा होगा।
मिश्र मानते हैं कि स्टार एनाइस के स्वाइन फ्लू के संक्रमण के खिलाफ रक्षा कवच मानने की खबर से दुनिया के अन्य देशों में भी इस बीमारी से निपटने के लिए देसी तरीकों की तलाश का सिलसिला शुरु हो सकता है।

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Saturday, April 25, 2009

पूरक परीक्षा का नतीजा दिया नहीं मुख्य परीक्षा की तारीख दे दी..

मप्र का सागर विवि केन्द्रीय विवि मे तब्दील तो हो गया है लेकिन वहां कामकाज अभी पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। इससे छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विवि ने बीफार्म कक्षाओं की पूरक परीक्षाओं के नतीजे तो घोषित नहीं किए परंतु मुख्य परीक्षा की तारीखों की घोषणा कर दी है। इसके चलते छात्र असमंजस मे पड़ गए हैं। पिछली परीक्षा का नतीजा जाने बिना अगली परीक्षा की पढ़ाई के लिए वे मन नहीं बना पा रहे हैं।
इस सिलसिले में सहायक रिजस्ट्रार वाईएस पटेल का कहना है कि बीफार्मा का रिजल्ट बन चुका है और एक दो दिन के अंदर घोषित हो जाएगा। लेकिन रिजल्ट घोषित किए जाने के पहले मुख्य परीक्षाओं की तिथि घोषित किए जाने के मामले की मुझे जानकारी नहीं हैं।

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Sunday, April 19, 2009

छात्र संगठन ने की प्रवेश पत्र की किमत कम करने की मांग...

केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनते ही सागर के डॉ० हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय मे प्रवेश की प्रक्रिया मे बदलाव किया जा रहा है। इसके चलते विभिन्न पाठ्यक्रमों मे प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा पास करनी होगी।

लेकिन नई प्रवेश की प्रक्रिया की शुरूआती चरण मे ही विभिन्न्‍ा छात्र संगठनों द्वारा विरोध शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के छात्र संगठन ने प्रवेश पत्र की कीमत पर ऐतराज जताया है।
छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष प्रियम द्विवेदी ने बताया कि विश्वविद्यालय नियमों की आड़ मे छात्र हितों की अनदेखी कर रहा है। विवि द्वारा प्रवेश पत्र की कीमत 100 रूपए से बढ़ाकर 600 रूपए किए जाने के निर्णय का छात्र संगठन विरोध कर रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि बुंदेलखण्ड पिछड़ा क्षेत्र है। विवि की प्रवेश की मंहगी प्रक्रिया की वजह से क्षेत्र के गरीब विद्यार्थियों के प्रवेश से वंचित रह जाने का खतरा पैदा हो गया है। अगर समय रहते विवि प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो संगठन आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएगा।

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Friday, April 17, 2009

मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों के समय मे फेरबदल...

डॉ० हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के मुख्य परीक्षा कार्यक्रम मे कुछ फेरबदल किया गया है। विवि के सहायक कुलसचिव परीक्षा ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति मे बताया कि बीए प्रथम, द्वितीय, Bsc तृतीय एवं एलएलबी द्वितीय वर्ष के प्रश्न पत्रों के समय मे बदलाव किया गया है। नए कार्यक्रम के मुताबिक

B.A. First Year Paper
Foundation Course Hindi Language
Old Date 02 May 2009 New Date 21 May 2009
B. A. 2Yr Linguistics First Paper
Old Date 6 June 2009 New Date 12 June 2009
B.Sc 3Yr Foundation Course
Third Paper Basics Of Computer & Information Technology
Old Date 19 May 2009 New Date 20 May 2009
L.LB 2Yr
Paper xvi Procedural Law -i CrPC Juvenil Justice
New Date 22 May 2009

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Tuesday, April 14, 2009

कैंसर रोग बन सकता है देश का किलर नं वन...

वर्तमान मे देश मे 15 से 20 लाख लोग कैंसर रोग से पीड़ित है। इतने ही नए लोग हर साल इस रोग का शिकार हो जाते हैं। जबकि इस रोग का शिकार होने वालों मे से आधे से ज्यादा लोग मौत का शिकार हो जाते है। अगर समय रहते इस रोग पर काबू नहीं पाया गया तो यह देश का "किलर नं० वन" रोग बना जाएगा। यह बात कैंसर केयर इंण्डिया के महासचिव पीके घोष ने सागर के केन्द्रीय विश्वविद्यालय में मप्र विज्ञान एवं तकनीकि परिषद् की सागर प्रकोष्ठ कैंसर केयर इण्डिया के संयुक्त तत्वावधान मे आयोजित एक सगोष्ठी के दौरान व्यक्त किए।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सागर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० एनएस गजभिए ने देश मे फैले अंधविश्वास को कैंसर जैसी घातक बीमारियों की फैलने की मुख्य वजह बताया। देश मे सांइटिफिक टेंम्पर नहीं होने की वजह से ही अंधविश्वास जोर बना हुआ है।
गजभिए ने बताया कि विज्ञान की नवीनतम नैनो तकनीकि व ल्क्ष्य भेदी दवा संचरण प्रणाली को कैसर जैसी घातक बीमारियों के लड्ने मे कारगर सिद्ध होगीं। उन्होने इस दिशा मे होने वालों शोधों कार्यों मे किसी भी हाल मे संसाधनों व धन की नहीं आने देने का आश्वासन दिया।
इसी सिलसिले मे कैंसर रोग विशेषज्ञ पीके घोष ने बताया कि कैंसर रोग पर काबू तभी संभव है जबकि इसका पता शुरूआती अवस्था मे ही चल जाए। यह जनजाग्रति के बिना हो पाना संभव नहीं है।
कार्यक्रम में भारत ओमान रिफायनरी बीना के डिप्टी डायरेक्टर सरकार,डा० आरके रावत, प्रो० जनक आही, प्रो० अरूण शाडिल्य, प्रो० अनूप बनर्जी, शहर के चिकित्सक डॉ० सीरोठिया, डॉ० हर्ष मिश्रा, डॉ० संतोष शुक्ला व छात्र -छात्राएं शामिल हुए।

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Friday, April 10, 2009

परीक्षा फार्म ऑन लाईन भरे जाएंगें...



शासकीय
पालीटैक्निक महाविद्यालय खुरई के विश्वविद्यालयीन परीक्षा मई-जून 2009 के फार्म एमपी आन लाईन की अधिकृत गुमटियों के जरिए ही भरे जाएंगें।
पालिटैक्निक के प्राचार्य के मुताबिक आन लाई फार्म भरने से पहले इन फार्मों को संस्थाओं से अग्रेषित या अनुमोदित कराना होगा। आदर्श फार्म नि:शुल्क वितरित किए जाएंगें।
इलेक्ट्रिकल, सिविल व मैकेनिकल के लिए क्रमश: गंलाबी, हरे व पीले रंग के फार्म रखे गए हैं। जबकि एक्स परीक्षार्थियों के फार्म का रंग सफेद रखा गया है। फार्म जमा करने की आखिरी तारीख 10 अप्रेल है।

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Tuesday, April 7, 2009

शुरू हुआ सागर विश्वविद्यालय का केन्द्रीय विश्वविद्यालय में बदलाव का सफर



प्रदेश
में पहले केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा पाने वाले डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में अब बदलाव की प्रक्रिया रंग दिखाने लगी है। सके चलते विश्वविद्यालय से जुडे़ कर्मचारियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों संबद्ध कालेजों में 'कहीं खुशी कहीं गम' के नजारे दिखने लगे हैं।

विश्वविद्यालय के केन्द्रीय बनने के सफर में सबसे अहम बदलाव प्रवेश प्रक्रिया में होने जा रहा है। केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.एस. गजभिए के मुताबिक नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने के लिए अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा को पास करना होगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय की खबर लगते ही डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से संबद्ध 146 निजी व शासकीय महाविद्यालयों के प्रबंधन में खलबली मच गई है। विश्वविद्यालय से संबद्ध कालेजों के संचालकों में से एक स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय के संचालक अनिल तिवारी का कहना है कि अगर प्रवेश की परीक्षा अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित की जाएगी तो इसे पास कर पाना बुंदेलखंड के ग्रामीण अंचलों के छात्र छात्राओं के लिए आसान नहीं होगा और वे प्रवेश से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभी तक प्रवेश प्रक्रिया के सिलसिले में विश्वविद्यालय ने कालेजों को कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में नए शिक्षण सत्र के विलंब से शुरू होने के हालात बन सकते हैं।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन प्रवेश प्रक्रिया के मामले में अपने इरादे साफ कर चुका है। वह इस मामले में कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचायरें से चर्चा के लिए 17 अप्रैल की तारीख तय की है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय के मापदंडों के मुताबिक प्रशिक्षित नियमित स्टाफ, गुणात्मक शिक्षा व बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं कराने वाले कालेजों की विश्वविद्यालय से संबद्धता समाप्त की जा सकती है।
इसके अलावा डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों में इस बात को लेकर काफी खुशी देखी जा रही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें छठे केन्द्रीय वेतनमान और 15 जनवरी से 31 मार्च तक केन्द्रीय विश्वविद्यालय के मुताबिक ही वेतन दिए जाने का आदेश जारी कर दिया है।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. अखिलेश्वर प्रसाद दुबे ने बताया कि इस आदेश के मुताबिक विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों को छठे केन्द्रीय वेतनमान व बढे़ हुए वेतन का 40 फीसदी अग्रिम भुगतान दिया जाएगा। लेकिन बढे़ हुए वेतन की खुशी में झूमते शिक्षकों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि अगर वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे तो उनको पदोन्नत भी किया जा सकता है। बताया गया है कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक, शिक्षकों द्वारा पेश किए जाने वाले शोध पत्रों व विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों की अध्यापन की तकनीक व ज्ञान के स्तर के बारे में की गई टिप्पणियों को शिक्षकों को पदोन्नति व वेतन वृद्धि देने के बारे में विचार के दौरान काफी अहमियत दी जाती है।
डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों के लिए अब तक पीएचडी की डिग्री लेना काफी आसान रहता था। लेकिन इसके केन्द्रीय विश्वविद्यालय में तब्दील होने के बाद विद्यार्थी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा तय किए गए मापदंडों के मुताबिक ही शोध की उपाधि हासिल कर पाएंगे।
इसी सिलसिले में सागर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति ने हाल ही में एक आदेश जारी कर शोध कार्यो के नए पंजीयन पर रोक लगा दी है। अब नए पंजीयन केन्द्रीय विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक ही हो सकेंगे।

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Thursday, April 2, 2009

ई-लाईब्रेरी के राशि डूबने से बची



लंबे
समय से विवादों, बैठकों आरोपों प्रत्यारोंपों में उलझा विश्वविद्यालय की -लाईब्रेरी की योजना अंतत: चालू वित्तीय वर्ष के आखरी दिन अपनी मंजिल पर पहुंच गया। सरकारी ऐजेंसी डीजीएसएंडडी को करीब एक करोड़ की लागत के कम्प्युटर खरीद के आदेश देने के साथ ही इस परियोजना पर काम की पुख्ता शुरू आत हो गई है

वर्षों से ई-पुस्तकालय योजना विश्वविद्यालय प्रशासन कोई निर्णय नहीं ले पा रहा था। इस वजह से राज्य सरकार द्वारा ई-लाईब्रेरी के लिए दी गई ढाई करोड़ की राशि के डूबने के हालात बन गए। लेकिन विवि के कुलपति एनएस गजभिए ने विशेष जोर देकर इस योजना को वक्त रहते पटरी पर ला दिया।

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Wednesday, April 1, 2009

सागर विश्वविद्यालय का 221 करोड़ का बजट पेश..



डॉ० हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद 221 करोड़ का अपना पहला बजट मंगलवार को पेश कर दिया। बजट मे खासतौर पर निर्माण कार्यों पर जोर दिया गया है।
विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी पीएन सिंह के मुताबिक नया कुलपति निवास, रजिस्ट्रार और और वित्त अधिकारी व अन्य स्टाफ के लिए आवास बनाने के लिए बजट मे विशेष प्रावधान किए गए हैं।

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