अभियोजक का दायित्व निष्पक्ष एवं निडर पैरवी
आम जनता का कानून पर विश्वास बनाये रखने में अभियोजक की भूमिका महत्वपूर्ण है। क्योंकि अपराध व्यक्ति विशेष के प्रति ना होकर सम्पूर्ण समाज के प्रति होता है। यदि अपराध का दोषी व्यक्ति छूट जाता है, तो समाज का विश्वास न्यायपालिका के प्रति डगमगानें लगता है। इस आशय के उद्गार न्यायमूर्ति श्री नारायण सिंह आजाद ने आज यहाँ प्रशासन अकादमी में अभियोजन अधिकारियों के पंचम समूह के प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ करते हुये व्यक्त किये।न्यायमूर्ति श्री आजाद ने कहा कि अभियोजक का दायित्व है कि वह निष्पक्ष एवं निडर होकर न्यायालय में पैरवी करे, ताकि दोषी छूटनें ना पाये। अभियोजक आपराधिक प्रकरण का सूक्ष्म परीक्षण करके ही न्यायालय में पैरवी करे। प्रकरण वापसी के समय भी अभियोजक को अपना स्वतंत्र एवं वैधानिक मत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिये।
संचालक लोक अभियोजन श्री नवल किशोर गर्ग ने प्रशिक्षु अधिकारियों से पदीय गरिमा बनाये रखनें की अपील की। उन्होंने बताया कि अभियोजन अधिकारियों को प्रशिक्षण के माध्यम से वैधानिक जानकारी देने के साथ-साथ आत्मविश्वास, निष्पक्षता एवं निर्भय होकर अपना कार्य करनें की भावना जाग्रत की जा रही है। इस अवसर पर संयुक्त संचालक लोक अभियोजन श्री एम.एस. अचाले, श्री डी.के. पालीवाल, न्यायाधीश (सर्तकता) ग्वालियर, प्रशिक्षण संचालक डॉ. नजमी, उप संचालक लोक अभियोजन श्री सतीश दिनकर के अलावा प्रशिक्षु अभियोजन अधिकारी उपस्थित थे।
संचालक लोक अभियोजन श्री नवल किशोर गर्ग ने प्रशिक्षु अधिकारियों से पदीय गरिमा बनाये रखनें की अपील की। उन्होंने बताया कि अभियोजन अधिकारियों को प्रशिक्षण के माध्यम से वैधानिक जानकारी देने के साथ-साथ आत्मविश्वास, निष्पक्षता एवं निर्भय होकर अपना कार्य करनें की भावना जाग्रत की जा रही है। इस अवसर पर संयुक्त संचालक लोक अभियोजन श्री एम.एस. अचाले, श्री डी.के. पालीवाल, न्यायाधीश (सर्तकता) ग्वालियर, प्रशिक्षण संचालक डॉ. नजमी, उप संचालक लोक अभियोजन श्री सतीश दिनकर के अलावा प्रशिक्षु अभियोजन अधिकारी उपस्थित थे।
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