मंहगाई से निपटने सरकार ने कसी कमर
राज्य सरकार ने मंहगाई की देशव्यापी मार के मद्देनज़र प्रदेश में अपने स्तर पर इससे निपटने की तैयारी कर ली है। खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन के निर्देश पर प्रमुख सचिव श्री अशोक दास ने संबंधित आला अफसरों की आज एक आपात बैठक यहाँ बुला कर इंतजामों का सिरे से जायजा लिया। राज्य सरकार ने राजधानी समेत अन्य बड़े शहरों में सस्ते भावों पर फिलहाल गेहूँ और चावल बेचने का फैसला कर लिया है।
एक हफ्ते में होगी कार्रवाई शुरू
राजधानी में 12 नवम्बर से
खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने कहा है कि राज्य सरकार ने अपनी विभिन्न कोशिशों के तहत प्रदेश में मुनाफाखोरी और कालाबाज़ारी के खिलाफ निरंतर मुहिम चला रखी है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को दुरूस्त करने की तो पिछले नौ महीनों से उसने हरसंभव कोशिश की जो अब देश में अनूठी बन गई है। इस सबके चलते मंहगाई रोकने के सिलसिले में उसका पक्ष उजला है।
श्री जैन ने दृढ़ता से कहा है कि तेजी से बढ़ रही मंहगाई की प्रमुख वजह केन्द्रीय नेताओं के वक्त-बेवक्त दिए गए बयान भी हैं जिन्होंने आग में घी का काम किया है।
राज्यमंत्री श्री जैन ने आज सुबह अपने विभाग के आला अफसरों को राज्य सरकार के स्तर पर गेहूँ और चावल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाए जाने के निर्देश दिये थे। दोपहर में भाप्रसे और अन्य स्तर के कोई आधा दर्जन अफसरों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की रणनीति तैयार की।
गेहूँ और चावल की बढ़ी कीमतों का सर्वाधिक असर शहरों पर माना गया है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल और एपीएल के गेहूँ और चावल रियायती दरों पर पूर्ववत दिये ही जा रहे हैं। तयशुदा रणनीति के तहत सस्ते गेहूँ और चावल बेचने का सिलसिला 12 नवम्बर को राजधानी से शुरू होगा।
इसे राज्य मंत्री श्री जैन खुद अंजाम देंगे। समांनांतर रूप से एक हफ्ते में जबलपुर शहर में भी यह इंतजाम हो जाएगा। यह तात्कालिक इंतजाम उचित मूल्य दुकानों के जरिए नही किया जाएगा।
गेहूँ, 13.50 रूपए प्रति किलो
17.40 रूपए होगा चावल का भाव
अफसरों ने तात्कालिक रूप से मंत्रालय में ही आज इस सस्ते गेहूँ और चावल के नमूने बुलाए और इनकी गुणवत्ता को परखा। आम घरों में रोज़मर्रा इस्तेमाल होने वाले गेहूँ और चावल का चयन किया गया। इस इंतजाम का कोई दलाल या मुनाफाखोर फायदा न उठा ले इसके लिए गेहूँ को 5,10,15,20,25 और 50 किलो की पैकिंग में बेचा जाएगा।
इसी तरह किसी को भी अधिकतम 50 किलो गेहूँ ही दिया जाएगा। इसकी कीमत 13 रूपए 50 पैसे प्रति किलो रहेगी। यही इंतजाम चावल के लिए भी रहेगा और इसकी कीमत 17 रूपए 40 पैसे प्रति किलो होगी। चूँकि बंदोबस्त सरकारी है इसलिए यह सख्त निगरानी रखी जाएगी कि कोई इए सामग्री की हेराफेरी या गोलमाल न कर ले।
कौन बेचेंगे गेहूँ, चावल
आज हुए फैसले के तहत सस्ता गेहूँ और चावल राज्य नागरिक आपूर्ति निगम तथा प्रियदर्शिनी उपभोक्ता भंडारों के आउटलेट्स से बेचा जाएगा। राजधानी और जबलपुर में यह प्रायोगिक शुरूआत अगले हफ्ते ही हो जाएगी। इसके बाद अन्य शहरों में इस सुविधा का विस्तार किया जाएगा। खाद्य सामग्री प्रदाय की व्यवस्था भारतीय खाद्य निगम और मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम के जिम्मे की गई हैं।
बैठक में खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री अशोक दास और आयुक्त श्री अजीत केसरी के अलावा नॉन प्रबंध संचालक श्री के.सी. गुप्ता, भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय महाप्रबंधक श्री समीर खरे, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां श्री अनिल शर्मा और अन्य आला अफसर मौजूद थे।
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