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Thursday, October 15, 2009

स्वास्थ्य व्यवस्था पर गठित कार्यदल की अनुशंसा

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर विचार विमर्श के बाद कार्यदल द्वारा जो अनुशंसाएं आज मंथन में प्रस्तुत की गई उनके प्रमुख बिंदु इस प्रकार है –
सिटीजन हेल्थ सर्विस चार्टर रिव्यू किया जाए एवं चार्टर अनुसार प्रशासकीय वित्तीय अधिकार संसाधन उपलब्ध कराया जाए।
क्लिनिकल कार्य में लगे डाक्टर की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष की जाए।
जहां एम.बी.बी.एस. डाक्टर नहीं है वहां आयुष डाक्टर को पदस्थ करने का अधिकार जिला स्तर पर हो ।
बीमार सहायता निधि के तहत डेढ़ लाख रूपये तक प्रकरण स्वीकृत करने का अधिकार जिला स्तर पर हो।
तेरह चिन्हित जटिल बीमारियों के अलावा अन्य घातक बीमारियों को जोड़ा जाए।
बी.ए.एम.एस.की महिला डाक्टर को प्रशिक्षण के बाद उन्हें प्रसव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकृत किया जाए।
प्रत्येक बच्चे का ट्रेकिंग सिस्टम बनाया जाए।
मॉनटरिंग व्यवस्था सुदढ़, सतत एवं नियमित हो।
स्वास्थ्य प्रपत्रों का सरलीकरण हो।
दायित्व के संबंध में जॉब चार्ट हो। उनका कठोरता से पालन हो।
मेडीकल कालेज में जिन विधाओं में पी.जी..पाठ्यक्रम नहीं है वहां वे पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं। फैक्ल्टी की अनुपलब्धता होने पर सेवानिवृत्त सक्षम डाक्टरों की सेवाएं ली जाएं।
मेडीकल कालेज में स्टेट ऑफ आर्ट की सुविधाएं एवं सुपर स्पेशलीटिज पाठ्यक्रम तत्काल प्रारंभ हों।
मेडीकल कालेज संकाय का वेतनमान राष्ट्रीय संस्थाओं के अनुसार हो।
आरक्षित पदों पर नियुक्ति की व्यवहारिक प्रक्रिया अपनाई जाए।
पारदर्शी स्थानांतरण नीति हो। पिछड़े क्षेत्रों में पदस्थ डाक्टरों को बाद में अन्य स्थानों में नियुक्त किया जाए।
गरीबों के इलाज के लिए समग्र योजना बनाई जाए।
अधिक से अधिक मेडीकल कालेज स्थापित हो।
स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक संरचना का पुनरावलोकन किया जाए।
चिन्हांकित बीमॉक एवं सीमॉक को प्राथमिकता पर क्रियाशील किया जाए। डाक्टरों से बांड के अनुरूप पालन कराया जाए।
प्रत्येक उपस्वास्थ्य केन्द्र में दो एएनएम की व्यवस्था आगामी 3 वर्ष तक सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक उप स्वास्थ्य केन्द्र के भवन बनाए जाए।
शालेय स्वास्थ्य कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।
आयुष चिकित्सा महाविद्यालय में नियत मानदण्डों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों।
प्रत्येक कर्मचारी की उपलब्धियों की नियमित एवं सघन समीक्षा हो। अच्छे कर्मचारियों को प्रोत्साहन एवं अनियमितता करने वालों को दंड देने की व्यवस्था हो।
प्रत्येक विकासखंड के पोस्ट मार्टम गृह अनिवार्य हो।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा की जिम्मेदारी सरपंच, ए.एन.एम., ए.डब्ल्यू.डब्ल्यू एवं आशा की हो।
एच.एम.आई.एस. का प्रभावी क्रियान्वयन हो।
आई.डी.सी.पी. का रिर्पोटिंग सिस्टम नियमित प्रभावी हो।
नर्सिंग एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन हो।
झलकियां
जूनियर डाक्टरों के भत्ते बढ़ाने की जैसे ही अनुशंसा कार्यदल ने प्रस्तुत की स्वास्थ्य मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने तत्काल कहा कि कल ही मुख्यमंत्री ने इस संबंध में निर्णय ले लिया है। ऐसी ही एक अन्य अनुशंसा कर्मचारियों की नियमित उपलब्धता पर स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति ऑनलाइन की जा रही है।
नगरीय विकास प्रशासन मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने जब सुझाव दिया कि अस्पतालों में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए आश्रय घर बनाया जाना चाहिए तब तत्काल मुख्यमंत्री ने इसकी जिम्मेदारी उन्हीं को सौंप दी।
अस्पतालों में निजी संस्थाओं की दुकाने न हो सिर्फ चैरेटेबिल संस्थाओं की हो तब श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि ऐसे में मरीज परेशान होंगे, स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्राइवेट वार्ड के मरीज को छोड़कर शेष सभी मरीजों को अस्पतालों से ही दवाई दी जाएंगी। जिले के प्रभारी मंत्री इसकी निगरानी करेंगे।

मंथन पर जनचर्चा का दौर शुरू हुआ तब स्वयं मुख्यमंत्री ने कमान सम्हाली और वे पीछे मुड़कर लंबी बात करने वाले अधिकारियों को टोकते रहे कि वे संक्षिप्त में बात कहे।

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